
World Music Day 2025: जब पूरी दुनिया विश्व संगीत दिवस के मौके पर सुरों, रागों और धुनों की सार्वभौमिक भाषा का उत्सव मना रही है, तब भारत की ओर से एक ऐसी आवाज़ को नमन किया जा रहा है, जिसने पिछले दो दशकों से संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज किया है श्रेया घोषाल।
भारत की सबसे प्रिय और बहुप्रशंसित पार्श्व गायिकाओं में शुमार श्रेया घोषाल न सिर्फ हिंदी सिनेमा की आवाज़ बन चुकी हैं, बल्कि उन्होंने तमिल, तेलुगु, बंगाली, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और अन्य भारतीय भाषाओं में भी बेमिसाल गायन किया है। वह अकेली ऐसी भारतीय गायिका हैं जिन्हें विभिन्न भाषाओं में सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के लिए पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
यहाँ उनके उन यादगार गीतों की झलक है, जिन्होंने उन्हें भारतीय संगीत का अनमोल रत्न बना दिया:
2002 – “बैरी पिया” (देवदास) | हिंदी

इस गीत के साथ श्रेया ने बॉलीवुड में कदम रखा और अपनी पहली ही फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया। यह उनकी मासूम, मीठी और शुद्ध शास्त्रीय शैली की पहली झलक थी।
2005 – “धीरे जलना” (पहेली) | हिंदी
एम.एम. कीरवानी की इस रहस्यमयी रचना में श्रेया की आवाज़ एक जलती हुई मोमबत्ती की तरह थी धीमी, पर हर लम्हे को रोशन करती हुई।
2007 – “ये इश्क हाये” (जब वी मेट) | हिंदी
लोक और सूफी के मेल से बने इस गीत में श्रेया की ऊर्जा और उनके सुरों की चंचलता ने इसे एक पीढ़ी का एंथम बना दिया।
2008 – “फेरारी मोन” (अंतहीन) | बंगाली

इस बेमिसाल बंगाली गीत में उनकी आवाज़ अकेलेपन और प्रेम की परिभाषा बन गई। भावनाओं को शब्दों से ज़्यादा सुरों से कहना श्रेया को आता है।
2008 – “जीव रंगला” (जोगवा) | मराठी

एक सामाजिक रूप से संवेदनशील मराठी फिल्म का गीत, जिसे श्रेया ने इतनी आत्मा से गाया कि भाषा की सीमाएं पूरी तरह टूट गईं।
2021 – “मायावा छायावा” (इरविन निझल) | तमिल

ए.आर. रहमान के संगीत में डूबी यह तमिल रचना श्रेया के गायन का प्रयोगात्मक और गूढ़ पक्ष सामने लाती है जहां सुर और आत्मा एक हो जाते हैं।
श्रेया घोषाल का सफर एक मिसाल है उन्होंने भारतीय पार्श्व गायन में एक स्वर्ण युग की नींव रखी है। अपनी आवाज़ से उन्होंने न केवल पुरस्कार जीते, बल्कि संगीतप्रेमियों के दिलों में स्थायी जगह बनाई है।
आज जब संगीत के माध्यम से दुनिया एक होती है, भारत अपनी सबसे मधुर, सबसे सशक्त और सबसे प्रिय आवाज़ श्रेया घोषाल का जश्न मना रहा है।
वह सिर्फ एक गायिका नहीं, बल्कि संस्कृतियों को जोड़ने वाली एक ध्वनि पुल हैं, भारत की शान हैं, और हमारे संगीत इतिहास का अमिट अध्याय।