
चंडीगढ़: किसान मजदूर मोर्चा चैप्टर पंजाब ने किसानों, मजदूरों और पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। चंडीगढ़ के किसान भवन में हुई बैठक में मोर्चे ने आने वाले दिनों के लिए आंदोलन का पूरा कार्यक्रम घोषित किया।
मोर्चे के अनुसार, 25 अगस्त 2026 से पंजाब के गांवों में फ्लेक्सियां लगाकर अभियान शुरू किया जाएगा। इसके बाद 31 अगस्त को सभी जिलों में डिप्टी कमिश्नर (DC) कार्यालयों के सामने एक दिवसीय धरने दिए जाएंगे। वहीं, 14 सितंबर से पंजाब सरकार के मंत्रियों के खिलाफ पांच दिवसीय मोर्चा शुरू करने की घोषणा की गई है। मोर्चे ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर रेल रोको आंदोलन भी शुरू किया जा सकता है।
शंभू-खनौरी मोर्चे से जुड़ी मांगें
किसान मजदूर मोर्चा ने शंभू-खनौरी आंदोलन से जुड़ी मांगों को प्रमुखता से उठाया है। मोर्चे ने मांग की है कि इस आंदोलन के दौरान किसानों और मजदूरों को हुए नुकसान की भरपाई की जाए। संगठन ने शंभू-खनौरी मोर्चे में घायल युवाओं को मुआवजा देने और आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले किसानों के परिवारों को बकाया मुआवजा व सरकारी नौकरियां देने की मांग की है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान दर्ज पुलिस, रेलवे और पराली से जुड़े मामलों को वापस लेने की मांग भी की गई है।
फसलों की सरकारी खरीद और कर्ज माफी की मांग
मोर्चे ने केंद्र सरकार से पंजाब में गेहूं और धान की सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही पंजाब सरकार के कथित 23 फसलों की सरकारी खरीद के वादे को लागू करने की मांग की गई है। मोर्चे के अनुसार, पहले चरण में बासमती, सरसों, मक्का, आलू और मूंग जैसी फसलों की सरकारी खरीद सुनिश्चित की जानी चाहिए। किसानों और मजदूरों के कर्ज को खत्म करने तथा उनके लिए किसान-मजदूर हितैषी कर्ज कानून बनाने की मांग भी उठाई गई है।
केंद्र की नीतियों के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग
मोर्चे ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, बिजली संशोधन विधेयक और बीज अधिनियम जैसे मुद्दों पर पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। संगठन चाहता है कि विधानसभा इन मुद्दों पर प्रस्ताव पारित करे। इसके अलावा पंजाब के पानी का मुद्दा रिपेरियन सिद्धांत के आधार पर हल करने और भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (BBMB) में पंजाब के अधिकार बहाल करने की मांग भी की गई है।
बाढ़ प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग
किसान मजदूर मोर्चा ने पिछले साल आई बाढ़ की निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठन के अनुसार, बाढ़ के कारणों की जांच के लिए एक स्वतंत्र ट्रिब्यूनल बनाया जाना चाहिए। मोर्चे ने बाढ़ से प्रभावित किसानों, मजदूरों और आम लोगों के बचे हुए नुकसान का मुआवजा देने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ठोस इंतजाम करने की मांग की है।
लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की मांग
बैठक में पंजाब सरकार की लैंड पूलिंग नीति वापस लेने की मांग भी उठाई गई। इसके अलावा पावरकॉम की ओर से 1,200 रुपये प्रति हॉर्स पावर की दर से VDS योजना चलाने की मांग की गई। मोर्चे ने बंदी सिंहों की रिहाई के लिए 15 अगस्त को राज्यपाल के आवास के घेराव के आह्वान का समर्थन करने की भी बात कही। साथ ही पंजोखरा साहिब में हरियाणा सरकार की कार्रवाई का विरोध किया।
गांव से राज्य स्तर तक आंदोलन मजबूत करने का ऐलान
किसान मजदूर मोर्चा पंजाब ने कहा कि किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम लोगों से जुड़े मुद्दों को लेकर संघर्ष को गांव स्तर से लेकर राज्य स्तर तक मजबूत किया जाएगा। मोर्चे ने पंजाब के किसानों, मजदूरों, युवाओं और आम लोगों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
बैठक में सरवन सिंह पंधेर, मनजीत सिंह राय, दिलबाग सिंह हरिगढ़, मनजीत सिंह नियाल, सुखविंदर कौर, बलदेव सिंह जीरा, गुरअमनीत सिंह मांगट, जंग सिंह भतेड़ी, बलकार सिंह बैंस, मलकीत सिंह गुलामीवाला, हंकार सिंह छोटा भंगाला, बलवंत सिंह बहिरामके और सुखचैन सिंह सहित विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।