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Operation Sindoor पर टिप्पणी करने वाले अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान गिरफ्तार…

नेशनल डेस्क : अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को  “ऑपरेशन सिंदूर” पर की गई टिप्पणी को लेकर गिरफ्तार कर लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स और उनके वकील की पुष्टि के अनुसार, उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। इस गिरफ्तारी से देशभर में तीखी बहस छिड़ गई है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

ऑपरेशन सिंदूर: सेना का साहसिक मिशन

आपको बता दें कि 7 मई 2025 को भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर सफल सैन्य कार्रवाई की। इस कार्रवाई को “ऑपरेशन सिंदूर” नाम दिया गया। इस ऑपरेशन के बारे में जनता को जानकारी देने के लिए एक मीडिया ब्रीफिंग आयोजित की गई, जिसमें विदेश सचिव के साथ कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह शामिल थीं। इन दोनों महिला अधिकारियों की मौजूदगी को देश की विविधता और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में देखा गया।

प्रोफेसर महमूदाबाद की टिप्पणी 

ऑपरेशन सिंदूर पर मीडिया ब्रीफिंग के बाद प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद ने सोशल मीडिया पर इस कार्यक्रम को “दिखावा” और “पाखंड” करार दिया। इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। हरियाणा राज्य महिला आयोग ने इस पर स्वत: संज्ञान लेते हुए महमूदाबाद को समन जारी किया।

महिला आयोग की आपत्ति

हरियाणा राज्य महिला आयोग का कहना है कि प्रोफेसर की टिप्पणी भारतीय सेना की महिला अधिकारियों को नीचा दिखाने वाली थी। आयोग ने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणियों में सांप्रदायिक रंग भी झलकता है, जिससे सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुँच सकती है। आयोग के अनुसार, यह एक संवेदनशील मुद्दा है और ऐसे वक्तव्यों से न केवल महिला अधिकारियों का मनोबल गिरता है, बल्कि सेना की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचता है।

प्रोफेसर का जवाब और सफाई

महमूदाबाद ने आयोग द्वारा भेजे गए समन का उत्तर दिया। अपने जवाब में उन्होंने कहा कि उनकी सोशल मीडिया पोस्ट महिला विरोधी नहीं थी और उन्हें गलत तरीके से समझा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आयोग जैसे संस्थान का वह सम्मान करते हैं, पर समन में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनकी टिप्पणी महिला अधिकारों या कानूनों के खिलाफ कैसे थी। उन्होंने अपने बयान में स्पष्ट किया कि कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के चयन की वे सराहना करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह अच्छा निर्णय था कि इन दोनों महिला अधिकारियों को भारत की विविधता का प्रतिनिधित्व करने के लिए मीडिया ब्रीफिंग में शामिल किया गया।

गिरफ्तारी के पीछे का तर्क

हालांकि, आयोग और संबंधित संस्थाएं इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुईं। आयोग ने महमूदाबाद की टिप्पणी को भारतीय सेना की कार्रवाई को बदनाम करने वाला और समाज में विभाजन की भावना फैलाने वाला बताया। इसके बाद कानूनी कार्रवाई के तहत उन्हें गिरफ्तार किया गया। यह मामला अब केवल एक सोशल मीडिया पोस्ट का नहीं रह गया है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है। प्रोफेसर महमूदाबाद की गिरफ्तारी से यह बहस फिर तेज हो गई है कि अकादमिक और बौद्धिक अभिव्यक्ति की सीमा क्या होनी चाहिए, खासकर तब जब विषय सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो।

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