जम्मू Sainik Colony: सनसनीखेज सैनिक कॉलोनी फिजियोथैरेपी सेंटर मर्डर केस दिन- ब-दिन उलझता ही जा रहा है। यह मामला पुलिस से लेकर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। 6 सदस्य जांच टीम इस मामले की जांच कर रही है लेकिन अभी तक यहां पर मकान के मालिक और फिजियोथेरेपी सेंटर चलाने वालों से लेकर गोली कांड में शामिल लोगों के बारे में कुछ ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। सूत्रों की माने तो यह घटना एक गोलीकांड से कहीं अधिक है। यहां पर मृतका और घायल युवितयों पर तेजधार हथियारों से भी कई वार किए गए।
क्या था मामला
21 अगस्त को मुंबई की 30 वर्षीय मेहजबीन अकील शेख, उनकी बहन फातिमा और 28 वर्षीय जसप्रीत कौर को दो लोगों द्वारा जम्मू के बाहरी इलाके में एक निजी निर्संग होम में लाया गया था, जिन्होंने दावा किया था कि उन्हें रिंग रोड पर एक सड़क दुर्घटना में चोटें लगी थीं। 29 अगस्त को मेहजबीन शेख ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अस्पताल में दम तोड़ दिया। एक जांच से पता चला कि तीनों को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा गोली मारी गई थी। यह मामला इतनी देर तक दबा रहा और इसका खुलासा तब हुआ जब मृतका की मां ने बिना पोस्टमार्टम के बेटी के शव को ले जाने के लिए पुलिस को अर्जी दी। सूत्रों की मानें तो सैनिक कॉलोनी के सेक्टर ए के 157 नंबर मकान में डेढ़ साल से अधिक समय से संदिग्ध गतिविधियां चल रही थीं। आसपास के लोगों को इसकी भनक थी। इस घर में लोगों का प्रवेश अगले गेट से ज्यादा पिछले गेट से होता था। यहां संदिग्ध लोग आते थे। देर रात तक आना जाना लगा रहता था। कई बार लोग दीवार फांदकर भी अंदर जाते थे।
यहां पर ज्यादा समय दो लोग रहते थे। उन दोनों को पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया है। उनमें से एक नवीन बक्शी है और दूसरा सुरेंद्र पाल। नवीन बक्शी यहां पर महिलाओं को भी लाता था। लोगों का आना-जाना लगा रहता था लेकिन उनकी गतिविधियां भी संदिग्ध थी। कहने को तो यहां पर एक फिजियोथैरेपी सेंटर चल रहा था लेकिन यहां पर किसी भी सेंटर का कोई बोर्ड ही नहीं लगा था। इसके अलावा घर के भीतर और आसपास कहीं भी किसी स्पा सेंटर या फिजियोथैरेपी सेंटर की कोई सूचना नहीं थी। ऐसे में यह बात जांच का विषय है कि अगर यहां पर कोई फिजियोथैरेपी सेंटर चल रहा था तो वह किसके नाम पर दर्ज था।
सूत्रों की मानें तो यह मकान किसी रिटायर्ड पुलिसकर्मी का बताया जा रहा है। इस मामले में उसकी क्या भूमिका है। इस बारे में भी पुलिस ने अभी तक कुछ नहीं बताया है। सबसे बड़ी हैरानी की बात यह भी है कि इस मकान में ताबड़तोड़ गोलियां चलती है लेकिन मामला बाहर नहीं आता। सबसे बड़ा सवाल यह बनता है कि क्या पुलिस अधिकारियों को इस बात की भनक ही नहीं थी या फिर किसी मोटी डील के चलते इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की जा रही थी। सूत्रों की मानें तो युवती का इलाज करने वाले डॉक्टर से भी पूछताछ की जा रही है। उसने जब इलाज शुरू किया तो गोली निकलने के बाद पुलिस को सूचित नहीं किया। क्या उसके साथ डील हुई थी या फिर उसे धमकाया गया था।

