Site icon Dainik Savera Times

1984 Sikh riots case: 1984 के रकाब गंज साहिब हिंसा मामले में HC पहुंचे मंत्री सिरसा, 30 नवंबर को अगली सुनवाई

Manjinder singh sirsa

Manjinder singh sirsa

1984 Sikh riots case: दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा आज दिल्ली उच्च न्यायालय में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उनकी याचिका में 1984 के सिख-विरोधी दंगों के दौरान गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब में हुई हिंसा में कांग्रेस नेता कमल नाथ की कथित भूमिका की विस्तृत जांच और उसके बाद कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर के लिए तय की है।

यह याचिका W.P.(CRL) 180/2022, मनजिंदर सिंह सिरसा बनाम भारत सरकार और अन्य के रूप में दायर की गई है। यह मामला संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR नंबर 601/1984 से जुड़ा है। यह 1 नवंबर 1984 को गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब पर भीड़ द्वारा किए गए हमले से संबंधित है। याचिका के अनुसार, इस हमले के दौरान दो सिखों को जिंदा जला दिया गया था। 12 फरवरी 2015 को, नरेंद्र मोदी सरकार ने 1984 की हिंसा से जुड़े गंभीर आपराधिक मामलों, जो पहले बंद कर दिए गए थे की फिर से जांच करने के लिए एक SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया। जब SIT ने रकाब गंज साहिब मामले की जांच करने में यह तर्क देते हुए असमर्थता जताई कि जिस मामले की सुनवाई पहले ही अदालत में हो चुकी है, वह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता तो मनजिंदर सिंह सिरसा ने यह मुद्दा तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के सामने उठाया। इसके बाद, गृह मंत्रालय ने जांच का दायरा बढ़ा दिया।

गृह मंत्रालय द्वारा 9 अप्रैल 2019 को जारी एक पत्र का हवाला देते हुए, SIT ने 19 अगस्त 2019 के एक आधिकारिक संचार में अपनी जांच के दायरे को स्पष्ट किया। इसमें कहा गया कि गंभीर मामले, जिन्हें आरोपियों के बरी होने के बाद बंद कर दिया गया था – उनकी जांच, आगे की जांच या फिर से जांच की जानी चाहिए। इसके बाद, SIT ने एक सार्वजनिक नोटिस जारी करके आम जनता और संगठनों से सात विशिष्ट मामलों के बारे में जानकारी मांगी, जिनमें FIR नंबर 601/1984 भी शामिल है। मुख्तियार सिंह, जिन्होंने पहले ही नानावटी आयोग के सामने गवाही दी थी, उन्होंने बाद में SIT के सामने भी अपना बयान दर्ज कराया।

सिरसा ने बताया कि उन्होंने 2018, 2019 और 2021 में सरकार और संबंधित अधिकारियों के सामने इस मामले को लेकर मांगें रखी थीं। उन्होंने गवाहों द्वारा पहले दिए गए बयानों और विभिन्न आयोगों के सामने पेश किए गए सबूतों—जिसमें मुख्तियार सिंह की गवाही भी शामिल है—की गहन जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यह पूरा रिकॉर्ड कमलनाथ की कथित भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जिसकी कानून के अनुसार जांच होनी चाहिए।

सिरसा ने कांग्रेस पार्टी से भी सवाल किया कि इन आरोपों के बावजूद कमलनाथ को ऊंचे पदों पर क्यों बिठाया गया। वे केंद्र सरकार में मंत्री रहे और बाद में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने। सिरसा ने कहा, “गांधी परिवार को यह बताना चाहिए कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद वे कमलनाथ का समर्थन क्यों कर रहे हैं। उन्हें सिख परिवारों को राजनीतिक संरक्षण देने के लिए माफी मांगनी चाहिए। ये परिवार न्याय और जवाबदेही चाहते हैं, न कि शक्तिशाली नेताओं को बचाने की कोशिशें।”

सिरसा ने आगे कहा, “यह न्याय की लड़ाई है, उन परिवारों के सम्मान की लड़ाई है जो दशकों से न्याय का इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस को यह नहीं सोचना चाहिए कि 1984 की घटनाएं लोगों की यादों से मिट जाएंगी, खासकर तब जब पीड़ित परिवार आज भी जवाब मांग रहे हैं। कोई भी राजनीतिक पद किसी को कानून से ऊपर नहीं रख सकता।”

अगली सुनवाई से पहले अदालत में अपना भरोसा जताते हुए, मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि वे न्याय पाने के लिए हर संभव कानूनी रास्ता अपनाते रहेंगे। उन्होंने कहा, “समय बीतने से सिख परिवारों का दर्द कम नहीं हो सकता। कमलनाथ की कथित भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए, और इस हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।” 30 नवंबर को होने वाली सुनवाई का जिक्र करते हुए, मंत्री सिरसा ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि इस सुनवाई से अहम फैसले आएंगे, सच्चाई सामने आएगी और हिंसा के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले सभी लोगों को कानून के अनुसार सजा मिलेगी।”

Exit mobile version