नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में चल रहे तनाव और युद्ध के कारण तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसका असर दुनियाभर में तेल की कीमतों पर पड़ रहा है, खासकर एशिया और यूरोप जैसे देशों पर, जो इन देशों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदते हैं। भारत भी पहले काफी हद तक मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर था, लेकिन अब वह दूसरे देशों से तेल खरीदने की कोशिश कर रहा है ताकि सप्लाई बनी रहे और कीमतों का असर कम हो।
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भारत अब कहां से खरीद रहा तेल?
एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सरकारी कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने अब अफ्रीकी देश अंगोला से करीब 20 लाख बैरल (2 मिलियन बैरल) कच्चा तेल खरीदा है। इसके अलावा, कंपनी ने एक्सॉन से भी तेल खरीदा। क्लोव और कैबिंडा जैसे तेल ग्रेड्स खरीदे गए। डिलीवरी मई के पहले हफ्ते में होने की उम्मीद है। सिर्फ HPCL ही नहीं, बल्कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) भी पश्चिम अफ्रीका से तेल खरीदने की कोशिश कर रही है।
मिडिल ईस्ट पर क्यों कम हो रही निर्भरता?
पहले भारत करीब 45% तेल मिडिल ईस्ट से आयात करता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं, Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) में तनाव बढ़ गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष से सप्लाई पर असर पड़ा। इस रास्ते के बंद होने से LPG (रसोई गैस) की सप्लाई सबसे ज्यादा प्रभावित हुई।
तेल इतना महंगा क्यों हो गया?
मिडिल ईस्ट का तेल इस समय दुनिया में सबसे महंगा हो गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2008 के रिकॉर्ड (147.50 डॉलर प्रति बैरल) से भी ऊपर पहुंच गईं। ओमान और दुबई के तेल बेंचमार्क में भी तेज़ बढ़ोतरी देखी गई। इससे एशियाई देशों के लिए तेल खरीदना महंगा हो गया है, और कंपनियां अब सस्ते विकल्प ढूंढ रही हैं।
भारत की नई रणनीति
भारत अब अफ्रीका (जैसे अंगोला, नाइजीरिया) एशिया-प्रशांत क्षेत्र से तेल खरीदकर अपनी सप्लाई को सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है। इसका फायदा यह है कि अगर मिडिल ईस्ट में संकट बढ़ता है, तो भी भारत के पास दूसरे विकल्प मौजूद रहेंगे। बतात चलें कि, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भारत को अपनी तेल नीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। अब भारत सिर्फ एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत कर रहा है।

