नई दिल्ली: कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल को 1 मई को गठित लोक लेखा समिति (पीएसी) का फिर से अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
लोकसभा सचिवालय ने कहा कि लोक लेखा समिति, जो संसद की सबसे पुरानी और सबसे प्रतिष्ठित समिति है, का गठन हर साल भारत सरकार के व्यय के लिए संसद द्वारा दी गई राशि के विनियोजन और संसद के समक्ष स्वायत्त और अर्ध-स्वायत्त निकायों के खातों के रूप में रखे गए ऐसे अन्य खातों की जांच के लिए किया जाता है।
सचिवालय ने कहा कि समिति सिविल, रक्षा, डाक, रेलवे और कराधान जैसे विभिन्न विषयों पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों की भी जांच करती है और यह विभिन्न केन्द्र प्रायोजित योजनाओं के निष्पादन मूल्यांकन और स्वप्रेरित रूप से चयनित विषयों पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों की भी जांच करती है।
इस बीच, भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के आधार पर समिति वित्तीय अनियमितताओं, अपव्यय, घाटे, देरी आदि के मामलों की जांच करती है और सरकार के कर प्रशासन के विभिन्न पहलुओं की भी गहराई से जांच करती है।
1967 से यह परंपरा चली आ रही है कि लोक सभा में विपक्ष के किसी प्रतिष्ठित नेता को लोक लेखा समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है।
लोकसभा सचिवालय ने कहा कि अतीत में, समिति की अध्यक्षता प्रोफेसर एनजी रंगा, एमआर मसानी, अटल बिहारी वाजपेयी, ज्योतिर्मय बसु, एचएन मुखर्जी, पीवी नरसिम्हा राव, आर वेंकटरमण, डॉ मुरली मनोहर जोशी आदि जैसे प्रतिष्ठित सांसदों ने की है।
18वीं लोकसभा के प्रथम वर्ष के दौरान, लोक लेखा समिति (2024-25) ने उल्लेखनीय परिश्रम का परिचय दिया तथा भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के प्रतिवेदनों से नियमित लेनदेन लेखापरीक्षा पैराग्राफों के साथ-साथ कार्य निष्पादन मूल्यांकन विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला की संवीक्षा की।
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