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‘सरकार की नजर परिसीमन पर, महिला आरक्षण सिर्फ बहाना’, लोकसभा में बोले गौरव गोगोई

नई दिल्ली: लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन बिल पेश होने के बाद इस पर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह महिलाओं के आरक्षण के नाम पर देश में परिसीमन (सीटों का नया बंटवारा) लागू करना चाहती है।

गोगोई ने कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिला आरक्षण के पक्ष में रही है, लेकिन सरकार इस प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बना रही है। उनका कहना है कि महिलाओं के आरक्षण को सीधे लागू किया जाना चाहिए, न कि इसे परिसीमन से जोड़ना चाहिए।

महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग रखा जाए- गौरव गोगोई

लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर बिल को सरल बनाया जाए और मौजूदा लोकसभा सीटों के आधार पर ही लागू किया जाए, तो इसे तुरंत लागू किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार ऐसी शर्तें जोड़ रही है, जिससे महिला आरक्षण लागू होने में देरी हो रही है। गोगोई ने यह भी कहा कि अगर सरकार 2023 में विपक्ष की बात मान लेती, तो 2024 में ही महिला आरक्षण लागू हो सकता था। उन्होंने सरकार से अपील की कि महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग रखा जाए। उनके मुताबिक, मौजूदा बिल असल में महिलाओं के लिए नहीं, बल्कि “पिछले दरवाजे से परिसीमन लागू करने” का तरीका है।

असदुद्दीन ओवैसी ने भी विरोध किया

इस बिल का विरोध असदुद्दीन ओवैसी ने भी किया। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव संविधान की मूल संरचना और संघीय व्यवस्था (फेडरल सिस्टम) के खिलाफ है। ओवैसी का आरोप है कि इस बिल के जरिए दक्षिण भारत के राज्यों पर असर डाला जा सकता है और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का प्रतिनिधित्व कम किया जा सकता है।

लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाए: सरकार 

यह बिल नारी शक्ति वंदन अधिनियम (2023) को लागू करने से जुड़ा है, जिसमें संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया था। सरकार की योजना है कि परिसीमन प्रक्रिया के जरिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 543 से 850 की जाए। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं। परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का नया निर्धारण। प्रस्ताव है कि इसे 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाए, जिससे राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आ सकता है।

विपक्ष का कहना है कि इस तरह के बड़े बदलाव को महिला आरक्षण से जोड़ना सही नहीं है। वहीं सरकार का दावा है कि वह 2029 के आम चुनाव से पहले महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना चाहती है। इस मुद्दे पर अब संसद के अंदर और बाहर दोनों जगह बहस तेज होने की संभावना है।

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