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दिल्ली में जीएसटी अधिकारियों ने कई ठिकानों की छापेमारी; 266 करोड़ के लेन-देन के फर्जी बिल पकड़े

July 13, 2025

दिल्ली में जीएसटी अधिकारियों ने कई ठिकानों की छापेमारी;  266 करोड़ के लेन-देन के फर्जी बिल पकड़े

नयी दिल्ली: वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) खुफिया महानिदेशालय की बेंगलुरू क्षेत्रीय इकाई की टीम ने एक मामले में दिल्ली में छह से अधिक ठिकानों पर छापे और तलाशी में 266 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के फर्जी चालानों का पता लगाया है।

वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को एक विज्ञप्ति में बताया कि यह कार्रवाई बेंगलुरू में शुरू किए गए एक मामले की जांच से जुड़ी है। इस मामले में शेयर बाजार में एक सूचीबद्ध कंपनी भी संलिप्त बतायी गयी और इसकी जानकारी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) को दी गयी है।

मामले के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया जा चुका है। वह एक सनदी लेखाकार (सीए) है।

इस मामले की जांच से पता लचा है कि फर्जी कंपनियों के साथ क्रय- विक्रय दिखा कर 48 करोड़ रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के लाभ उठाए गए या लाभ करवाये गये।

इस काम में लगे शातिर व्यक्तियों ने ऐसी कंपनियां बनायी, जिनका कोई वास्तविक कारोबार नहीं था। कागज पर काम दिखाने के लिए सर्कुलर ट्रेडिंग की गयी। इपपुट टैक्स क्रेडिट ( सामान बनाने में लगे संसाधन पर पहले जमा कर का लाभ) प्राप्त करने के इस गोरखधंटे में एक कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध भी कराया गया।

जांच से पता चला कि बिना किसी व्यावसायिक गतिविधि के चार कंपनियों ने अपने हिसाब-किताब में सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की वस्तुओं और सेवाओं की प्राप्ति दिखाई है। जांच से पता लगा कि शुरुआत में, तथाकथित साजिश करने वाला मुख्य व्यक्ति एक चार्टटर्ड अकाउंटेट और वैधानिक लेखा परीक्षक था। वह इन कंपनियों के लेन-देन संभालता था।

यह भी पता चला कि इकाइयों के गठन और शेयरधारिता में बदलाव के साथ, यह सीए/वैधानिक लेखा परीक्षक किसी समय इनमें से कुछ फर्जी कंपनियों में निदेशक के रूप में भी कार्यरत था । इससे छह फर्जी कंपनियों की स्थापना के पीछे उसका संबंध साफ हो गया है। इन कंपनियों के परिसरों की तलाशी के दौरान, इस मुख्य साजिशकर्ता के परिसरों से मूल दस्तावेज, जैसे चालान और मुहरें, मिलीं। उसे अब गिरफ्तार कर लिया गया है।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि डीजीजीआई बेंगलुरु जोनल यूनिट ने इस धोखाधड़ी की व्यापक जांच शुरू की है। इसका असर सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश करने वाले निर्दोष निवेशकों पर पड़ सकता है। बयान में यह भी कहा गया है कि सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा सर्कुलर ट्रेडिंग और फर्जी कर क्रेडिट के उपयोग से जीएसटी धोखाधड़ी के ऐसे तरीके का पता चलने के बाद, डीजीजीआई ने हाल में बाजार विनियामक सेबी के साथ कुछ खास जानकारी साझा की है।

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