नई दिल्ली: सरदार इंदर इकबाल सिंह अटवाल ने कहा कि सिक्किम के राज्यपाल के रूप में श्री दुष्यंत गौतम जी की नियुक्ति का कांग्रेस नेताओं द्वारा विरोध करना उनकी दोहरी राजनीतिक मानसिकता को उजागर करता है। मैं इस विरोध की कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ।
अटवाल ने कहा कि कांग्रेस नेताओं को दलित समाज के सम्मान और प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल का रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए और बताना चाहिए कि उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को संवैधानिक पदों पर उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए क्या ठोस कदम उठाए।
इंदर इकबाल सिंह अटवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने वंचित वर्गों के सम्मान और प्रतिनिधित्व को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी इसका एक प्रमुख उदाहरण हैं। दलित समाज का सम्मान और संवैधानिक प्रतिनिधित्व राजनीतिक नारों का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय की बुनियादी कसौटी है।
उन्होंने कहा कि संवैधानिक नियुक्तियों का मूल्यांकन योग्यता, अनुभव और दायित्वों के आधार पर होना चाहिए, न कि राजनीतिक पूर्वाग्रहों के आधार पर। मैं कांग्रेस से आग्रह करता हूँ कि वह दोहरे मापदंडों की राजनीति छोड़कर सामाजिक न्याय के प्रति अपनी वास्तविक प्रतिबद्धता सिद्ध करे।

