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मोदी कैबिनेट का बड़ा फैसला, गुवाहाटी-तेजपुर हाईवे प्रोजेक्ट को हरी झंडी; पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत

Guwahati Tezpur highway project

Guwahati Tezpur highway project

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने गुरुवार को असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-15 (एनएच-15) के तहत गुवाहाटी-तेजपुर कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी। लगभग 135.871 किलोमीटर लंबे इस चार-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे का निर्माण बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) टोल मॉडल पर किया जाएगा, जिस पर कुल 8,970.20 करोड़ रुपए का निवेश किया जाएगा।

यह परियोजना ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी हिस्से में स्थित मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) पर बढ़ते यातायात दबाव को कम करने में मदद करेगी। इसके अलावा, भारतीय वायु सेना के साथ समन्वय कर तेजपुर बाईपास पर 4.9 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ईएलएफ) का भी निर्माण किया जाएगा, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सैन्य विमानों का उपयोग किया जा सके।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इस परियोजना के तहत कुल 58.7 किलोमीटर लंबाई के पांच प्रमुख बाईपास बनाए जाएंगे, जिससे बैहाटा चरियाली, सिपाझार, खरूपेटिया, देकियाजुली और तेजपुर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में यातायात जाम की समस्या में काफी राहत मिलेगी। बयान के मुताबिक, इस हाईवे परियोजना में 15 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 19 फ्लाईओवर और तेजपुर बाईपास क्षेत्र में एक हाथी अंडरपास का निर्माण भी शामिल है। इसके अलावा यातायात की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 46 अंडरपास, 19 फ्लाईओवर और लगभग 210 किलोमीटर लंबी सर्विस रोड भी बनाई जाएंगी।

 

सरकार का कहना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद यात्रा की औसत गति में लगभग 100 प्रतिशत तक वृद्धि होगी और यात्रा समय आधा रह जाएगा। इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, ईंधन की बचत होगी और वाहन संचालन लागत में कमी आएगी। साथ ही क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। यह कॉरिडोर असम और अरुणाचल प्रदेश के महत्वपूर्ण आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा। परियोजना से माल और यात्रियों की आवाजाही अधिक तेज और सुगम होने की उम्मीद है।

सरकार के अनुसार, उन्नत हाईवे कॉरिडोर से पीएम गति शक्ति योजना के तहत 8 आर्थिक नोड (औद्योगिक पार्क), दो सामाजिक नोड (दरांग और उदलगुड़ी जिले), तथा तीन प्रमुख पर्यटन स्थल सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। इन पर्यटन स्थलों में मां कामाख्या मंदिर, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान और ओरंग राष्ट्रीय उद्यान शामिल हैं। इसके अलावा, यह परियोजना सात महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक नोड्स को भी जोड़ेगी, जिनमें तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन, दो हवाई अड्डे और दो जलमार्ग टर्मिनल शामिल हैं। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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