नई दिल्ली: नेशन फर्स्ट पॉलिसी रिसर्च एंड चेंज फाउंडेशन (एनएफपीआरसी) ने इंडिया हैबिटेट सेंटर में सांसदों और विधायकों के लिए जलवायु-अनुकूल कृषि, सिंचाई, फसल बीमा, डिजिटल संचार और विधायी क्षमता निर्माण विषयों पर विशेष कार्यशाला आयोजित की। इसमें लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के जनप्रतिनिधियों ने भाग लेकर नीति निर्माण और सुशासन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विशेषज्ञों से संवाद किया।
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए एनएफपीआरसी के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और जलवायु-अनुकूल शासन व्यवस्था बेहद आवश्यक है। उन्होंने फसल विविधीकरण, जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार, फसल बीमा और डिजिटल संवाद को मजबूत बनाने पर जोर दिया।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार सिंह तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के उप महानिदेशक डॉ. राजबीर सिंह ने कहा कि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन इसे बनाए रखने के लिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और सूक्ष्म सिंचाई जैसी तकनीकों को व्यापक स्तर पर अपनाना होगा। उन्होंने मोटे अनाज, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी बताई।
आईसीआरआईईआर के विशिष्ट प्रोफेसर एवं नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), ड्रोन और डिजिटल सप्लाई चेन जैसी आधुनिक तकनीकों ने भारतीय कृषि को नई दिशा दी है और 2015-16 के बाद कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
कार्यशाला में संचार एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ अरुण यादव ने डिजिटल संचार, सोशल मीडिया रणनीति, तथ्य सत्यापन, साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार एआई के उपयोग पर प्रशिक्षण दिया। समापन अवसर पर डॉ. अभिनव प्रकाश ने शोध-आधारित नीति निर्माण, विधायी क्षमता निर्माण और संस्थागत सहयोग को मजबूत बनाने के प्रति एनएफपीआरसी की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रतिभागियों ने इस कार्यशाला को जनप्रतिनिधियों की क्षमता बढ़ाने और सुशासन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
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