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‘क्या सत्ता पाने के लिए देश को तोड़ने की प्लानिंग कर रहे’, निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर हमला

Nishikant Dubey attacks Rahul Gandhi

Nishikant Dubey attacks Rahul Gandhi

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर गंभीर आरोप लगाए हैं। दुबे ने सवाल किया है कि क्या राहुल गांधी सत्ता हासिल करने के लिए “भारत के बंटवारे की योजना” बना रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लगाए आरोप

निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर कुछ दस्तावेज शेयर किए। उन्होंने दावा किया कि ये दस्तावेज राहुल गांधी के खिलाफ सबूत हैं। दुबे ने राहुल गांधी को “टुकड़े-टुकड़े गैंग का सरगना” बताते हुए कहा कि वे विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि उन्होंने इन आरोपों पर चर्चा के लिए लोकसभा अध्यक्ष से अनुमति मांगी है। दुबे ने यह भी सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के नेता सत्ता पाने के लिए देश को बांटने की साजिश कर रहे हैं।

लोकसभा स्पीकर को पत्र

दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मांग की है कि राहुल गांधी के हालिया संसद भाषण के बाद उनके कथित “गलत कामों” की जांच के लिए एक विशेष संसदीय जांच समिति बनाई जाए। अपने पत्र में दुबे ने कहा कि राहुल गांधी “देश को अंदर से अस्थिर करने वाले गिरोह” का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी “फोर्ड फाउंडेशन” के सक्रिय सदस्य हैं और यह संस्था उनकी विदेश यात्राओं का खर्च उठाती है।

जॉर्ज सोरोस से जुड़े आरोप

मीडिया से बातचीत में दुबे ने कहा कि उन्होंने लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक प्रस्ताव (मोशन) पेश किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस जैसी ताकतों की मदद से देश को गुमराह कर रहे हैं। दुबे ने मांग की है कि राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता समाप्त की जाए। उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित किया जाए।

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिरिजू ने कहा है कि लोकसभा में बीजेपी सांसद राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस (Privilege Notice) लाने की तैयारी कर रहे हैं। उनका आरोप है कि राहुल गांधी ने सदन को गुमराह किया और बेबुनियाद बयान दिए।

राहुल गांधी का जवाब

इन आरोपों के बीच राहुल गांधी ने कहा है कि वे किसानों और आम लोगों के हक के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने केंद्र सरकार को चुनौती दी कि अगर उनके बयान से नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाया जाए।

आगे क्या?

इस मामले ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। अगर संसद में इस पर बहस या जांच समिति बनती है, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

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