नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने खिलाफ आए नो-कॉन्फिडेंस मोशन (अविश्वास प्रस्ताव) के नोटिस को लेकर एक अहम फैसला लिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने नैतिक आधार पर यह तय किया है कि जब तक इस नोटिस पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक वे लोकसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे।
यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब कांग्रेस पार्टी ने आज स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस दिया। इस नोटिस पर कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा के सेक्रेटरी-जनरल को निर्देश दिया है कि वे इस नो-कॉन्फिडेंस नोटिस की जांच करें और नियमों के अनुसार जरूरी कार्रवाई करें।
संबित पात्रा का कांग्रेस पर तीखा हमला
इस मुद्दे पर बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी संसद के नियमों और प्रक्रियाओं का पालन नहीं करते और फिर दूसरों पर भरोसा न होने की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि संसद इस पूरे मामले का जवाब देगी। संबित पात्रा ने आगे कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया कि पहले भी पार्टी ने तमिलनाडु के एक जज के खिलाफ दीपम केस में इंपीचमेंट लाने की योजना बनाई थी। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मामले में स्थिति साफ कर दी है, जिससे कांग्रेस की मंशा पर सवाल उठते हैं।
नो-कॉन्फिडेंस नोटिस में इन चार घटनाओं का जिक्र
वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने बताया कि आज दोपहर 1 बजकर 14 मिनट पर, संसद के नियम 94C (रूल्स एंड प्रोसीजर) के तहत स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन का नोटिस दिया गया। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि स्पीकर पर “खुले तौर पर पक्षपात” करने के आरोप हैं। विपक्ष का दावा है कि कई मौकों पर उनके नेताओं को सदन में बोलने नहीं दिया गया।
नो-कॉन्फिडेंस नोटिस में चार अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया गया है। इनमें एक बड़ा आरोप यह भी है कि लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। राहुल गांधी उस दौरान साल 2020 में चीन के साथ हुए सीमा विवाद पर चर्चा करना चाहते थे और उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अभी प्रकाशित न हुई यादों का हवाला भी दिया था।

