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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर आया राजनाथ सिंह का बयान, कहा- दुनिया भर में चिंता बढ़ती जा रही

rajnath singh

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट के देशों के बीच चल रहा तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। खासकर अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है। हालात ऐसे हैं कि कोई भी देश पीछे हटने को तैयार नहीं दिखाई दे रहा। इस वजह से दुनिया भर में चिंता बढ़ती जा रही है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

राजनाथ सिंह ने जताई चिंता
इसी बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी मिडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि इस समय हालात सामान्य नहीं हैं और आगे क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना अभी मुश्किल है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता वैश्विक शांति और आर्थिक व्यवस्था के लिए खतरा बन सकती है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत
रक्षा मंत्री ने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि यह इलाका दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इसलिए अगर इस रास्ते में किसी तरह की रुकावट आती है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

तेल और गैस सप्लाई पर पड़ सकता है असर
राजनाथ सिंह ने कहा कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य या फारस की खाड़ी के इलाके में किसी तरह की बाधा आती है तो तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वैश्विक व्यापार भी प्रभावित होता है और कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी असर
रक्षा मंत्री ने कहा कि फारस की खाड़ी में अस्थिरता का सीधा असर भारत पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र से आने वाले तेल और गैस से पूरा करता है। अगर यहां संकट बढ़ता है तो भारत सहित कई देशों को ऊर्जा आपूर्ति में दिक्कतें आ सकती हैं।

युद्ध का बदलता स्वरूप
राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि आज के समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले युद्ध केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित थे, लेकिन अब मुकाबला अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है। कई देश नई तकनीकों और आधुनिक हथियारों के जरिए अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं। यह स्थिति दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। अलग-अलग देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और टकराव भविष्य में और गंभीर समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

‘नया नॉर्मल’ बनती जा रही है अस्थिरता
रक्षा मंत्री ने चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता कहीं नया सामान्य (नया नॉर्मल) न बन जाए। अगर ऐसा होता है तो इससे वैश्विक शांति और विकास दोनों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि दुनिया को मिलकर ऐसे हालात को संभालने की कोशिश करनी चाहिए, ताकि वैश्विक स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा बनी रहे।

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