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पंजाब में धान-गेहूं चक्र के कारण बढ़ता जल संकट, MP Satnam Singh Sandhu ने चिंता जताई; कृषि मंत्री ने दिया जवाब

Satnam Sandhu expresses concern water crisis in Punjab due rice-wheat cycle

Satnam Sandhu expresses concern water crisis in Punjab due rice-wheat cycle

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंजाब के किसान देश के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं और उनकी वजह से भारत अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बन पाया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में अनाज क्रांति के कारण अनाज उत्पादन में बहुत बढ़ोतरी हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी याद दिलाया कि 15वीं सदी में सिख गुरु नानक देव जी ने बाजरे (कोदरा) के उपयोग की सलाह दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बाजरे के महत्व को समझा और इसे बढ़ावा दिया, जिससे यह भारत और दुनिया में एक पौष्टिक अनाज के रूप में लोकप्रिय हुआ।

सतनाम सिंह संधू के सवाल, कृषि मंत्री के जवाब 

राज्यसभा में सांसद सतनाम सिंह संधू ने पंजाब में बाजरे की खेती बढ़ाने और फसल विविधीकरण के लिए बनाई गई नीतियों के बारे में सवाल पूछा। उन्होंने बताया कि पंजाब में ज्यादातर जमीन पर धान-गेहूं की खेती होती है, जो बहुत पानी की मांग करती है। पंजाब का 75% खेती योग्य ज़मीन धान-गेहूं पर है और राज्य का 80% भूजल “डार्क ज़ोन” में आ गया है, यानी पानी की कमी गंभीर रूप से बढ़ रही है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है:
-नेशनल फ़ूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन मिशन (NFSNM) के तहत 28 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में बाजरे की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पंजाब के लिए 2025-26 में 31.60 लाख रुपये मंज़ूर किए गए।
-प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत फसल विविधीकरण प्रोग्राम में पंजाब के किसानों को पारंपरिक फसलों से बाजरा, दाल, तिलहन और अन्य अनाज की ओर बढ़ाने के लिए 103.75 करोड़ रुपये मंज़ूर किए गए।
-NFSNM स्कीम के तहत 2025-26 में पंजाब में कुल 140 क्विंटल बाजरे के बीज वितरित किए गए।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए PLI और PMFME स्कीम चला रही है। पिछले पांच साल में फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और एक्सपोर्टर्स को 800 करोड़ रुपये दिए गए हैं। पंजाब के कपूरथला, पटियाला और जालंधर में तीन प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। PMFME स्कीम के तहत पंजाब में बाजरे के लिए 5 माइक्रो-फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स को मंजूरी दी गई।

बाजरे का उत्पादन बढ़कर 185.92 लाख टन हुआ 

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार ने धान-गेहूं के चक्र के बजाय बाजरे को वैकल्पिक फसल के रूप में बढ़ावा देने में सफलता हासिल की है। भारत में बाजरे का उत्पादन 2021-22 में लगभग 160 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 185.92 लाख टन हो गया है। मंत्री ने चेताया कि पिछले दशकों में पानी और रासायनिक खादों के अधिक इस्तेमाल से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हुई है और पंजाब में पानी की कमी गंभीर होती जा रही है।

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