Last Updated: October 7, 2026

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देश के विकास का स्तर उसकी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में झलकता है: मुर्मु

March 3, 2025

देश के विकास का स्तर उसकी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में झलकता है: मुर्मु

नयी दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि किसी भी देश के विकास का स्तर उसकी शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता में झलकता है। राष्ट्रपति ने सोमवार को यहां राष्ट्रपति भवन में दो दिन के विजिटर कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। राष्ट्रपति 184 केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों की विजिटर यानी कुलाध्यक्ष हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रमुखों से कहा कि भारत को ज्ञान अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य को हासिल करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने शिक्षा के साथ-साथ शोध पर भी अत्यधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने बहुत अच्छे उद्देश्य से राष्ट्रीय अनुसंधान कोष की स्थापना की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उच्च शिक्षा संस्थान इस महत्वपूर्ण पहल का अच्छा उपयोग करेंगे और शोध को प्रोत्साहित करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षा समुदाय की महत्वाकांक्षा यह होनी चाहिए कि संस्थानों के शोधकर्ताओं को विश्व स्तर पर मान्यता मिले, संस्थानों के पेटेंट दुनिया में बदलाव ला सकें और विकसित देशों के छात्र उच्च शिक्षा के लिए भारत को पसंदीदा गंतव्य के रूप में चुनें। उन्होंने कहा कि भारत के छात्र अपनी प्रतिभा से विश्व के अग्रणी शिक्षण संस्थानों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं को समृद्ध करते हैं। उन्होंने देश में उनकी प्रतिभा का उपयोग करने के लिए प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति के रूप में स्थापित करने का राष्ट्रीय लक्ष्य तभी हासिल होगा जब विश्व समुदाय प्रयोगशालाओं में किए जा रहे कार्यों को अपनाने के लिए उत्सुक होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के कई उच्च शिक्षा संस्थानों की वैश्विक ब्रांड वैल्यू है। इन संस्थानों के छात्रों को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों और कंपनियों में बड़ी जिम्मेदारियां मिलती हैं। सभी संस्थानों को बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। हमारी बड़ी युवा आबादी की अपार प्रतिभा को विकसित और उपयोग करके उच्च शिक्षा संस्थानों के प्रमुखों के नेतृत्व को मान्यता दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि देश में वैज्ञानिक उपलब्धियों की समृद्ध परंपरा है। देश के हर क्षेत्र में भारतीय ज्ञान और विज्ञान की शाखाएं और उप-शाखाएं फली-फूली हैं। गहन शोध करके ज्ञान और विज्ञान की अमूल्य लेकिन विलुप्त धाराओं को फिर से खोजना बहुत उपयोगी होगा। उन्होंने कहा कि आज के संदर्भ में ऐसी व्यवस्थित रूप से विकसित ज्ञान प्रणालियों का उपयोग करने के तरीके खोजना उच्च शिक्षा पारिस्थितिकी तंत्र की जिम्मेदारी है। उद्घाटन सत्र के दौरान राष्ट्रपति ने नवाचार, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी विकास श्रेणियों में आठवें विजिटर्स अवार्ड प्रदान किए। नवोन्मेष के लिए विजिटर अवार्ड बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सरिपेला श्रीकृष्ण को दिया गया, जिन्होंने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा देने के लिए क्वांटम प्रौद्योगिकी में नवीन स्वदेशी नवोन्मेष विकसित किया।

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