नई दिल्ली। दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में गुरुवार को उस समय तनाव बढ़ गया, जब छात्रसंघ ने कुलगुरु के खिलाफ विश्वविद्यालय परिसर से शिक्षा मंत्रालय तक ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने की घोषणा की। प्रशासन ने पहले ही साफ कर दिया था कि परिसर के बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है और मार्च को विश्वविद्यालय के अंदर ही सीमित रखा जाए।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र मुख्य गेट की ओर बढ़ने लगे और बाहर जाने की कोशिश की। गेट पर तैनात पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसी दौरान छात्रों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हो गई।
छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने उनके साथ मारपीट की, जबकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और उन पर हमला किया। कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। एसएचओ किशनगढ़ समेत कुछ पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया।
#WATCH दिल्ली: JNU कैंपस से सुबह की वीडियो।
JNU स्टूडेंट यूनियन ने UGC के नियमों को लागू करने की मांग को लेकर सुबह-सुबह प्रोटेस्ट किया। दिल्ली पुलिस ने स्टूडेंट्स को कैंपस के अंदर रोकने के लिए बैरिकेड्स लगाए थे। pic.twitter.com/difTAGy4fr
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 27, 2026
बैरिकेड हटाकर बाहर जाने की कोशिश, कई छात्र हिरासत में
छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका के बाबू, महासचिव सुनील यादव, संयुक्त सचिव दानिश अली और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार अपने समर्थकों के साथ बैरिकेड हटाकर बाहर जाने लगे। जैसे ही छात्र मुख्य द्वार पार करने लगे, पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अब तक करीब 50 छात्रों को हिरासत में लिया गया है। दक्षिणी-पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल ने बताया कि अनुमति नहीं होने के बावजूद दोपहर करीब 3:20 बजे लगभग 500 छात्र मुख्य गेट से बाहर निकलने लगे। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाया और हालात बिगड़ गए।
पुलिस का यह भी कहना है कि कुछ छात्रों ने बैनर, डंडे और जूते फेंके, धक्का-मुक्की की और कुछ ने पुलिसकर्मियों को काटने तक की कोशिश की। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पूरे मामले की जांच की जा रही है।
छात्रों ने लगया ये आरोप
छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा का कहना है कि वे शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, लेकिन बिना वर्दी में मौजूद लोगों ने उन्हें घसीटकर हिरासत में लिया। छात्र नेताओं का दावा है कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने पूरे परिसर को घेर लिया था और छात्रों को बाहर नहीं जाने दिया गया। झड़प के दौरान एक छात्र के हाथ में चोट लगी, जबकि हिरासत में ले जाते समय एक छात्रा पुलिस बस में बेहोश हो गई।
कुलगुरु के बयान के विरोध में प्रदर्शन
छात्रों का यह मार्च विश्वविद्यालय की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के कथित जातिसूचक बयान के विरोध में निकाला जा रहा था। छात्र अपनी मांगों को शिक्षा मंत्रालय तक पहुंचाना चाहते थे। उनका कहना है कि वे अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखना चाहते थे।
…यूजीसी नियम लागू करना संभव नहीं
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कहा कि छात्रसंघ द्वारा यूजीसी के नियम लागू करने की मांग इस समय उचित नहीं है। प्रशासन के अनुसार इन नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही रोक लगा रखी है, इसलिए कुलपति या रजिस्ट्रार इन्हें लागू नहीं कर सकते।
प्रशासन का यह भी कहना है कि कुछ छात्रों के खिलाफ कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि परिसर में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और हिंसा की घटनाएं हुईं। इन मामलों की जांच प्राक्टोरियल प्रक्रिया के तहत की गई है।
प्रशासन ने यह भी कहा कि हिंसा और तोड़फोड़ के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए एक महिला ओबीसी कुलगुरु पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं, जो सही नहीं है।
पुलिस अधिकारी का आया बयान
पुलिस का कहना है कि स्थिति अब नियंत्रण में है। हिरासत में लिए गए छात्रों से पूछताछ की जा रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है।
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