नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में चल रही उथल-पुथल के बीच सरकार ने साफ किया है कि भारत के पास कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, देश के पास कुल मिलाकर लगभग 8 हफ्तों का तेल भंडार है, जिसमें स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी शामिल हैं। इससे किसी भी अल्पकालिक संकट की स्थिति में देश की ऊर्जा जरूरतें पूरी की जा सकती हैं।
सूत्रों ने बताया कि इस समय भारत के पास करीब 25 दिनों का कच्चे तेल का स्टॉक है। इसके अलावा, लगभग 25 दिनों का पेट्रोल और डीज़ल का भंडार भी उपलब्ध है। इन सभी को मिलाकर भारत के पास लगभग आठ हफ्तों तक की जरूरतें पूरी करने लायक तेल मौजूद है। सरकार का कहना है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति फिलहाल आरामदायक है। देश पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है, लेकिन पर्याप्त स्टॉक और अलग-अलग देशों से तेल आयात करने की व्यवस्था के कारण सप्लाई में किसी बड़ी बाधा की आशंका कम है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम
भारत का केवल लगभग 40 प्रतिशत कच्चा तेल ही होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते आता है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत तेल अन्य मार्गों और स्रोतों से आयात किया जाता है। इससे इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का सीधा असर भारत पर सीमित पड़ता है। भारत रूस से भी पहले से तय समझौतों के तहत कच्चा तेल आयात कर रहा है। इसके अलावा, सरकार एलपीजी (रसोई गैस) और एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) की सप्लाई के मामले में भी देश को सुरक्षित स्थिति में बता रही है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का फिलहाल कोई प्लान नहीं
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद देश में फिलहाल पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें बढ़ाने की कोई तत्काल योजना नहीं है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोमवार को मंत्रालय और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर कच्चे तेल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। मंत्रालय ने कहा है कि बदलते हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश में जरूरी पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और किफायती दाम सुनिश्चित किए जाएंगे।
निर्यात-आयात पर असर की समीक्षा
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने भी पश्चिम एशिया में उभर रहे भू-राजनीतिक हालात का भारत के निर्यात-आयात पर संभावित असर जानने के लिए सभी संबंधित मंत्रालयों और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के साथ बैठक की। इस बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव सुचिंद्र मिश्रा और डीजीएफटी (विदेश व्यापार महानिदेशक) लव अग्रवाल ने की।
बैठक में शिपिंग कंपनियों, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC), वित्तीय सेवाओं विभाग, पेट्रोलियम मंत्रालय, पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और निर्यात प्रोत्साहन से जुड़ी एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
चर्चा में जहाजों के रूट बदलने, ट्रांजिट समय बढ़ने, कंटेनर की उपलब्धता, भाड़ा और बीमा लागत में संभावित बदलाव और समय-संवेदनशील निर्यात पर असर जैसे मुद्दों पर विचार किया गया। मंत्रालय ने कहा कि कार्गो की आवाजाही सुचारु रखने, अनावश्यक देरी कम करने और निर्यातकों-आयातकों के लिए दस्तावेज़ीकरण और भुगतान प्रक्रिया को आसान बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
सरकार का आश्वासन
सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है और देश में तेल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

