
नई दिल्ली [भारत]: केंद्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बुधवार को राज्यसभा में ‘ ऑपरेशन सिंदूर ‘ पर एक विशेष चर्चा में भाग लिया, जो हाल ही में पहलगाम आतंकवादी हमले पर भारत की प्रतिक्रिया थी।
चर्चा का उत्तर देते हुए, शाह ने हमले में मारे गए नागरिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और ऑपरेशन सिंदूर तथा ऑपरेशन महादेव के तहत त्वरित एवं निर्णायक कार्रवाई के लिए सुरक्षा बलों की सराहना की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बधाई देते हुए कहा कि उन्होंने 140 करोड़ भारतीयों की भावनाओं के अनुरूप कड़ी प्रतिक्रिया देने की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाई।
शाह ने सदन को बताया कि 28 जुलाई को चलाए गए ऑपरेशन महादेव के तहत, कश्मीर में सुरक्षा बलों ने लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकवादियों, सुलेमान, अफगान और जिबरान को मार गिराया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन से पहलगाम हमले में लश्कर की संलिप्तता की पुष्टि हुई और ऑपरेशन सिंदूर के तहत हमले के मास्टरमाइंडों का सफाया कर दिया गया।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारतीय सुरक्षा बलों ने आतंकवाद का दुनिया भर में अब तक का सबसे सटीक और त्वरित जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि लश्कर से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने सदन को बताया कि ऑपरेशन महादेव में मारे गए तीन आतंकवादियों के पास से तीन राइफलें बरामद की गईं – एक 19 एम-4 कार्बाइन और दो एके-47। उन्होंने आगे बताया कि पहलगाम हमले के बाद, एनआईए ने बैसरन घाटी से खाली कारतूस बरामद किए थे, जिनकी फोरेंसिक साइंस लैब में जाँच की गई थी। जब ये आतंकवादी मारे गए, तो उनसे बरामद राइफलों की जाँच की गई, और फोरेंसिक मिलान के बाद, यह सौ प्रतिशत निश्चितता के साथ पाया गया कि पहलगाम हमले में इन्हीं तीनों राइफलों का इस्तेमाल किया गया था। यह भी पाया गया कि इनमें से 44 कारतूस 19 एम-4 कार्बाइन के थे, और 25 कारतूस एके-47 राइफल के थे। शाह ने कहा कि एनआईए ने गहन जाँच की, 1055 लोगों के बयान लिए, संदिग्धों के स्केच बनाए और उन्हें शरण देने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया।
अमित शाह ने कहा कि हमारी एजेंसियों ने 22 मई से 22 जुलाई तक लगातार आतंकवादियों की मौजूदगी की जानकारी की पुष्टि करने के प्रयास किए। उन्होंने कहा कि सेना की 4 पैरा के नेतृत्व में सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के जवानों ने मिलकर आतंकवादियों को घेरा और 28 जुलाई को चलाए गए ऑपरेशन में हमारे निर्दोष नागरिकों की हत्या करने वाले तीनों आतंकवादियों का सफाया कर दिया गया।
विपक्ष पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि विपक्ष के एक पूर्व गृह मंत्री इस बात का सबूत मांग रहे हैं कि आतंकवादी पाकिस्तान से आए थे। उन्होंने विपक्ष पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष अभियानों के महत्व को समझे बिना उनके नामकरण पर सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि “हर हर महादेव” शिवाजी महाराज की सेना द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक ऐतिहासिक युद्धघोष था।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार में कहा था कि आतंकवादियों के पास जो भी ज़मीन बची है, उसे नष्ट कर दिया जाएगा, और आज उनके प्रशिक्षण शिविर, मुख्यालय और लॉन्च पैड सब तहस-नहस कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि आतंकवादियों के आकाओं को बख्शा नहीं जाएगा, और आज आतंकवादियों को भेजने वालों को भी हमारी सेनाओं ने नेस्तनाबूद कर दिया है।
अमित शाह ने कहा कि 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक हुई और न केवल पाकिस्तान, बल्कि पूरी दुनिया को यह कड़ा संदेश दिया गया कि भारत की सीमा, सेना, नागरिकों और संप्रभुता के साथ खिलवाड़ करने पर उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि CCS की बैठक में जवाहरलाल नेहरू द्वारा हस्ताक्षरित 1960 की सिंधु जल संधि, जो एकतरफा तौर पर पाकिस्तान को फायदा पहुँचा रही थी, को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। उन्होंने सिंधु जल संधि को एकतरफा बताते हुए तर्क दिया कि भारतीय किसानों का भी पानी पर अधिकार है। अब, कुछ ही समय में सिंधु नदी से कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बाद अटारी से होकर गुजरने वाली इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट को बंद कर दिया गया, पाकिस्तानी नागरिकों के सार्क वीजा निलंबित कर दिए गए और सभी को वापस पाकिस्तान भेज दिया गया। नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में कार्यरत उनके रक्षा, सैन्य और नौसेना सलाहकारों को अवांछनीय व्यक्ति घोषित किया गया तथा उनकी संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी गई। उन्होंने कहा कि सीसीएस की बैठक में यह संकल्प लिया गया कि आतंकवादियों को भेजने वालों और ऐसा कृत्य करने वालों को दंडित किया जाएगा और इसके लिए सीसीएस की बैठक में सेना को खुली छूट दी गई।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने 30 अप्रैल को सशस्त्र बलों को ‘ऑपरेशनल फ़्रीडम’ दे दी है और रक्षा मंत्रालय तथा सेना दोनों ही लक्ष्य, तरीका, स्थान और समय तय करेंगे। उन्होंने कहा कि 7 मई को प्रातः 1:04 बजे पाकिस्तान के 9 आतंकवादी ठिकानों को नष्ट कर दिया गया जिसमें कम से कम 100 आतंकवादी मारे गए और मोदी सरकार व हमारी सेनाओं ने लश्कर, जैश और हिज़्बुल के मुख्यालयों को ध्वस्त करने का कार्य किया।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार की नीतियों के कारण कश्मीर में आतंकवाद 70% तक कम हो गया है और शांति की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि पहले आतंकवादी बाहर से नहीं आते थे, केवल कश्मीरी युवा ही बंदूक उठाते थे, अब एक भी कश्मीरी युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल नहीं होता। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के हटने से कश्मीर में अलगाववाद और आतंकवाद पर लगाम लगी है।
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “आत्मनिर्भर भारत” के माध्यम से हमारे सैन्य उपकरणों का निर्यात बढ़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की तुष्टिकरण की नीतियों ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया और अब पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकवादियों के तंत्र को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि कश्मीर में पत्थरबाजी और हड़तालें शून्य हो गई हैं और शांति की एक नई शुरुआत हुई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने आतंकवादियों के जनाज़ों पर प्रतिबंध लगा दिया है और कड़े कदम उठाए हैं।
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