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Padmini Ekadashi 2026: इस दिन रखा जाएगा पद्मिनी एकादशी का व्रत; जानिए शुभ मुहूर्त और इसकी पौराणिक कथा

Kamika Ekadashi 9 august 2026

Kamika Ekadashi 9 august 2026

Padmini Ekadashi 2026: सनातन परंपरा में पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिमास या मलमास भी कहा जाता है, अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। बता दें कि इसी पावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाता है। धार्मिक ग्रंथों में इसे पुरुषोत्तमी और कमला एकादशी के नाम से भी वर्णित किया गया है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से साधक को पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

धर्म शास्त्रों के अनुसार, यह व्रत केवल भोजन त्यागने का अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए इस व्रत से संतान सुख, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता है।

पद्मिनी एकादशी 2026 की तिथि और शुभ समय

हिंदू पंचांग के मुताबिक, वर्ष 2026 में पद्मिनी एकादशी का व्रत 27 मई, बुधवार को रखा जाएगा। उदयातिथि को मान्यता दिए जाने के कारण इसी दिन व्रत करना श्रेष्ठ माना गया है।

प्रमुख समय

एकादशी तिथि आरंभ: 26 मई 2026, मंगलवार सुबह 05:10 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 27 मई 2026, बुधवार सुबह 06:21 बजे
व्रत रखने की तिथि: 27 मई 2026, बुधवार
पारण का समय: 28 मई 2026, गुरुवार सुबह 05:25 बजे से 07:56 बजे तक

धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत का पारण निर्धारित शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए। हरिवासर काल में पारण करने से बचना शुभ माना जाता है।

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पद्मिनी एकादशी की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रेतायुग में महिष्मति नगरी के राजा कीर्तिवीर्य अत्यंत प्रतापी और समृद्ध शासक थे। उनके पास वैभव और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी, लेकिन संतान न होने के कारण वे मानसिक रूप से दुखी रहते थे।

कई यज्ञ और धार्मिक उपाय करने के बाद भी जब उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं हुआ, तब उन्होंने राजसी जीवन त्यागकर तपस्या का मार्ग अपनाया। उनकी प्रिय पत्नी रानी पद्मिनी भी इस कठिन तप में उनके साथ रहीं।

दोनों ने गंधमादन पर्वत पर वर्षों तक कठोर साधना की। रानी पद्मिनी की भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर माता अनुसुइया प्रकट हुईं और उन्होंने अधिमास की शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत करने का उपाय बताया।

राजा और रानी ने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से इस व्रत का पालन किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें तेजस्वी और पराक्रमी पुत्र का आशीर्वाद दिया। मान्यता है कि रानी पद्मिनी के नाम पर ही इस एकादशी का नाम पड़ा।

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क्या है इस व्रत का आध्यात्मिक महत्व?

पद्मिनी एकादशी व्यक्ति को यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में भी श्रद्धा और धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। यह व्रत सांसारिक मोह से ऊपर उठकर भगवान विष्णु की भक्ति में मन लगाने की प्रेरणा देता है। धार्मिक दृष्टि से इसे अत्यंत पुण्यदायी और कल्याणकारी माना गया है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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