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80 टन का शिखर और नींव नहीं, कई भूकंप बर्दाश्त कर चुका है 1 हजार वर्ष पुराना ये शिव मंदिर

SAWAN 2025: सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगती है। तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित बृहदेश्वर मंदिर एक ऐसा ही प्रसिद्ध शिव मंदिर है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि अपनी शानदार वास्तुकला (Architecture) के लिए भी दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यह मंदिर चोल वंश द्वारा बनवाया गया था और आज भी उनकी शक्ति और कला का प्रतीक माना जाता है। यह मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है। इसे राजराज चोल प्रथम ने बनवाया था।

-मंदिर का निर्माण: 1004 ईस्वी में शुरू हुआ

-पूरा हुआ: 1010 ईस्वी में

-सिर्फ 6 साल में इतना भव्य मंदिर तैयार कर दिया गया

विश्व धरोहर में शामिल बृहदेश्वर मंदिर

-इस मंदिर को 1987 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिला। इसका मतलब है कि यह मंदिर सिर्फ भारत नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।

 ग्रेनाइट पत्थरों से बना विशाल मंदिर

-हैरानी की बात यह है कि तंजावुर में ग्रेनाइट नहीं मिलता, फिर भी पूरा मंदिर इसी से बना है।

-इतिहासकारों के अनुसार, 3000 हाथियों और सैकड़ों बैलों की मदद से यह पत्थर दूर-दराज की खदानों से लाए गए थे।

-पत्थरों को लाने के लिए नदी और नहरों का सहारा लिया गया।

 

80 टन का शिखर और चोल इंजीनियरिंग का कमाल

मंदिर का सबसे ऊपरी हिस्सा जिसे शिखर या विमान कहते हैं, इसकी ऊंचाई: लगभग 200 फीट, इस पर 80 टन वजनी ग्रेनाइट गुंबद लगाया गया है। इसे ऊपर ले जाने के लिए चोल इंजीनियरों ने झुकाव वाला लकड़ी का पुल (रैंप) बनाया था। यह गुंबद आज भी मजबूती से खड़ा है, और भूकंप को भी सहने की क्षमता रखता है।

मंदिर एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र

बृहदेश्वर मंदिर उस समय केवल पूजा का स्थान नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक केंद्र भी था। शाम को यहां संगीत और नृत्य का आयोजन होता था। मंदिर को 160 दीपकों और मशालों से रोशन किया जाता था। घी की आपूर्ति के लिए 2832 गायें, 1644 भेड़ें, और 30 भैंसें रखी जाती थीं।

बृहदेश्वर मंदिर द्रविड़ वास्तुकला का एक सुंदर उदाहरण है

  1. गर्भगृह – यहाँ शिवलिंग स्थित है (2 मंज़िला ऊंचा विशाल लिंग)
  2. अर्धमंडप – गर्भगृह से जुड़ा छोटा हॉल
  3. महामंडप – मुख्य पूजा कक्ष
  4. मुखमंडप – प्रवेश के पास का मंडप
  5. नंदी मंडप – जिसमें बड़ा नंदी बैल है

मंदिर पूर्व-पश्चिम दिशा में बना है, और इसके दो बड़े प्रवेश द्वार (गोपुरम) हैं। इन पर भगवान शिव के जीवन की झलकियां उकेरी गई हैं। मंदिर के द्वारों पर दो विशाल द्वारपाल मूर्तियाँ हैं। ये एक-एक पत्थर से बनाई गई हैं और चोल शिल्पकला का शानदार नमूना हैं।

मंदिर परिसर में और भी कई देवताओं के मंदिर हैं।

-भगवान गणेश

-भगवान सुब्रह्मण्यम

-देवी बृहन्नायकी

-चंडिकेश्वर

-भगवान नटराज

 

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