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अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में भारी उत्साह, अब तक 2.20 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके हैं दर्शन

Amarnath Yatra : देशभर के श्रद्धालुओं में बाबा बर्फानी के दर्शन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। 3 जुलाई 2025 से शुरू हुई अमरनाथ यात्रा के महज 12 दिनों में अब तक 2.20 लाख से अधिक तीर्थयात्री पवित्र गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। आपको बता दें कि मंगलवार को भी 6,388 श्रद्धालुओं का एक और जत्था जम्मू से कश्मीर की ओर रवाना हुआ।

दो जत्थों में रवाना हुए यात्री

अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार सुबह भगवती नगर यात्री निवास से तीर्थयात्रियों को दो काफिलों में रवाना किया गया।

– पहला काफिला सुबह 3:26 बजे, जिसमें 103 वाहन और 2,501 यात्री शामिल थे, बालटाल बेस कैंप की ओर निकला।

– दूसरा काफिला सुबह 4:15 बजे, जिसमें 145 वाहन और 3,887 यात्री थे, नुनवान (पहलगाम) बेस कैंप के लिए रवाना हुआ।

मौसम की निगरानी के बाद ही दी जाएगी आगे बढ़ने की अनुमति

मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बालटाल और नुनवान बेस शिविरों से पवित्र गुफा की ओर जाने की अनुमति मौसम की स्थिति की समीक्षा के बाद ही दी जाएगी।

चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था

इस बार की अमरनाथ यात्रा को लेकर प्रशासन अत्यधिक सतर्क है। हाल ही में पहलगाम हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों द्वारा 26 नागरिकों की हत्या के बाद सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है। सेना, BSF, CRPF, SSB और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर CAPF की 180 अतिरिक्त कंपनियां तैनात की गई हैं। भगवती नगर से लेकर पवित्र गुफा तक के संपूर्ण मार्ग, दोनों बेस कैंपों और सभी पारगमन शिविरों को सुरक्षा बलों द्वारा सुरक्षित किया गया है।

दो मार्गों से होती है यात्रा

अमरनाथ यात्रा के लिए दो मार्ग निर्धारित हैं:

1. पहलगाम मार्ग – यह मार्ग चंदनवाड़ी, शेषनाग और पंचतरणी होते हुए गुफा मंदिर तक जाता है। इस मार्ग की लंबाई लगभग 46 किलोमीटर है, जिसे पूरा करने में श्रद्धालुओं को 4 दिन लगते हैं।

2. बालटाल मार्ग – यह अपेक्षाकृत छोटा मार्ग है, जिसकी कुल लंबाई 14 किलोमीटर है। यात्री इस मार्ग से एक ही दिन में यात्रा पूरी कर वापस लौट सकते हैं।

इस वर्ष सुरक्षा कारणों से किसी भी श्रद्धालु के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं है।

यात्रा 9 अगस्त को होगी संपन्न

38 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 3 जुलाई को शुरू हुई थी और 9 अगस्त 2025 को श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। यह यात्रा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है।

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