Amarnath Yatra 2025 : इस वर्ष 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ यात्रा का शुभारंभ हो चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जम्मू-कश्मीर की पहलगाम और बालटाल रूट से कठिन चढ़ाई कर अमरनाथ गुफा की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। खास बात यह है कि इस बार बाबा बर्फानी ने विशाल शिवलिंग के रूप में दर्शन दिए हैं, जिसे लेकर भक्तों में विशेष उत्साह और श्रद्धा देखी जा रही है। ऐसे में आइए आज जानते हैं कि आखिर क्या इन कबूतरों की कहानी…
अमरनाथ की गुफा में रहने वाले “अमर कबूतर”
यात्रा के साथ ही एक बार फिर अमरनाथ की पवित्र गुफा में अमर कबूतरों की रहस्यमयी कहानी भी चर्चा में आ गई है। मान्यता है कि ये कबूतर साक्षात अमर हैं और आज भी उसी गुफा में निवास करते हैं जहाँ भगवान शिव ने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई थी।
क्या है अमर कथा की पौराणिक कथा?
पुराणों के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रश्न किया कि आप तो अमर हैं, लेकिन मुझे हर जन्म में कठोर तपस्या करनी पड़ती है, ऐसा क्यों? इस पर भगवान शिव ने उन्हें वह अमर कथा सुनाने का वादा किया जिसे सुनने मात्र से कोई भी अमर हो जाता है।
परंतु उन्होंने यह भी कहा कि यह कथा किसी ऐसे स्थान पर सुनाई जाएगी जहाँ कोई दूसरा जीव उसे न सुन सके, क्योंकि कोई भी श्रोता इस कथा को सुनकर अमर हो सकता है। इसी उद्देश्य से शिवजी माता पार्वती को लेकर अमरनाथ गुफा पहुंचे।
कबूतरों ने सुन ली अमर कथा
कथा सुनाने से पहले शिवजी ने माता पार्वती से कहा कि वे बीच-बीच में “हूं-हूं” कहकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहें, ताकि उन्हें पता चले कि वे जाग रही हैं। लेकिन कथा के दौरान पार्वतीजी को नींद आ गई। तभी गुफा में बैठे दो कबूतर उनकी जगह गूं-गूं की ध्वनि निकालते रहे।
कथा समाप्त होने पर शिवजी ने देखा कि पार्वती जी सो रही हैं और कबूतर कथा का साक्षात्कार कर चुके हैं। भगवान क्रोधित हुए और उन्हें मारने के लिए आगे बढ़े, लेकिन कबूतरों ने प्रार्थना करते हुए कहा कि उन्होंने पूरी कथा सुनी है और अगर उन्हें मार दिया गया तो कथा झूठी सिद्ध हो जाएगी। भगवान शिव ने उन्हें क्षमा कर जीवनदान दिया और वरदान दिया कि वे सदैव इस गुफा में निवास करेंगे।
अमर कबूतरों का आध्यात्मिक महत्व
माना जाता है कि इन कबूतरों के दर्शन बहुत ही दुर्लभ हैं और केवल भाग्यशाली तीर्थयात्री ही इन्हें देख पाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन कबूतरों को देखना आध्यात्मिक प्रगति का संकेत होता है। जो इन्हें देख लेता है, वह आत्मज्ञान की ओर अग्रसर होता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

