Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार मई महीने की पहली एकादशी अपरा एकादशी होगी, जिसे अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत का महत्व अत्यंत विशेष माना गया है, क्योंकि इसे करने से जीवन में पुण्य की प्राप्ति होती है और पापों का नाश होता है।
कब मनाई जाएगी अपरा एकादशी?
इस वर्ष मई की पहली एकादशी 13 मई को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन व्रत का पारण सुबह 05:31 बजे से 08:14 बजे के बीच किया जा सकेगा। वहीं द्वादशी तिथि का समापन उसी दिन सुबह 11:20 बजे होगा।
क्यों खास है अपरा एकादशी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अपरा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अपार पुण्य मिलता है, इसी कारण इसे “अपरा” कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से धन, समृद्धि, मान-सम्मान में वृद्धि होती है और व्यक्ति को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति जन्म और मृत्यु के चक्र से भी मुक्ति पा सकता है। यही वजह है कि इसे अत्यंत फलदायी एकादशी माना जाता है।
पूजा विधि क्या है?
अपरा एकादशी के दिन भक्त प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और घर के मंदिर में भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करते हैं।
पूजा में घी का दीपक जलाया जाता है और भगवान को अक्षत, पुष्प, फल, नारियल तथा सूखे मेवे अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद एकादशी व्रत कथा का श्रवण और भगवान विष्णु की आरती की जाती है। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है। अगले दिन व्रत का पारण निर्धारित समय में किया जाता है।
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क्या करें और क्या विशेष है?
इस दिन भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप विशेष फलदायी माना गया है। साथ ही भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा भी की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य, जरूरतमंदों को भोजन कराना, सूर्य देव को अर्घ्य देना और तुलसी पूजा करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है। व्रत रखने वाले व्यक्ति को फलाहार ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।
अपरा एकादशी को आत्मिक शुद्धि, भक्ति और मोक्ष की दिशा में एक महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से जीवन में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं।
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