महाशिवरात्रि 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाएगी। यह पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे विशेष दिन माना जाता है। इस दिन भक्त व्रत रखकर, रुद्राभिषेक कर और शिवलिंग का पूजन करके भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि यदि महाशिवरात्रि पर विधि-विधान से शिवलिंग पर चंदन या भस्म का तिलक लगाया जाए, तो रोग, भय और ग्रह दोष से राहत मिलती है।
आइए जानते हैं कि शिवलिंग के किन-किन स्थानों पर तिलक या त्रिपुंड लगाना शुभ फलदायी माना गया है।

1. शिवलिंग के शीर्ष पर तिलक
महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग के शीर्ष भाग पर चंदन या भस्म का तिलक अवश्य लगाना चाहिए। इस स्थान पर त्रिपुंड बनाना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
2. गणेश स्थान पर तिलक
शिवलिंग के दाहिनी ओर भगवान गणेश का स्थान माना जाता है। इस स्थान पर चंदन का तिलक लगाने से जीवन की विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती है। इससे भगवान शिव के साथ-साथ गणेश जी का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है।
3. कार्तिकेय स्थान पर तिलक
शिवलिंग के बाईं ओर भगवान कार्तिकेय का स्थान माना जाता है। यहां चंदन का तिलक या त्रिपुंड लगाने से आत्मबल में वृद्धि होती है और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
4. अशोक सुंदरी स्थान पर तिलक
जिस स्थान से अभिषेक का जल नीचे की ओर बहता है, उसे अशोक सुंदरी का स्थान कहा जाता है। इस भाग पर चंदन का तिलक लगाने से पारिवारिक कलह दूर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
5. शिवलिंग के पीछे का भाग (नंदी स्थान)
धार्मिक परंपराओं के अनुसार शिवलिंग के पीछे वाले भाग को नंदी का स्थान माना जाता है। यहां भस्म या चंदन का तिलक लगाने से रुके हुए कार्य पूरे होते हैं और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
6. नंदी जी के सींग और कानों पर तिलक
हर शिव मंदिर में नंदी जी की प्रतिमा स्थापित होती है। महाशिवरात्रि के दिन नंदी जी के सींग या कानों पर भी तिलक लगाने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे भक्त की प्रार्थना सीधे भगवान शिव तक पहुंचती है।
तिलक लगाते समय रखें इन बातों का ध्यान
तिलक हमेशा दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से लगाएं।
त्रिपुंड बनाने के लिए तर्जनी, मध्यमा और अनामिका उंगलियों का प्रयोग किया जा सकता है।
तिलक के लिए केवल चंदन (लाल या सफेद) या भस्म का ही उपयोग करें।
पहले शिवलिंग पर तिलक लगाएं, उसके बाद अपने मस्तक पर।
पूजन के समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव अवश्य रखें।
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महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का अवसर है। इस दिन श्रद्धा से किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कर्म भी विशेष फल प्रदान करते हैं। मान्यता है कि विधि-विधान से तिलक और पूजन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
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