धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयादशमी का दिन नए और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए भी अच्छा माना जाता है। इस दिन अपराह्न काल में पूजा करने की परंपरा है, जबकि कई स्थानों पर शाम के समय रावण दहन किया जाता है। अगर आप भी दशहरे पर पूजा की तैयारी कर रहे हैं, तो आइए जानते हैं विजय मुहूर्त, अपराह्न पूजा का समय और अलग-अलग शहरों के अनुसार शुभ मुहूर्त।
दशहरा पूजा का शुभ मुहूर्त
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
अपराह्न पूजा का समय: दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक
दशमी तिथि प्रारंभ: 20 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:50 बजे
दशमी तिथि समाप्त: 21 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2:11 बजे
श्रवण नक्षत्र प्रारंभ: 19 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3:38 बजे
श्रवण नक्षत्र समाप्त: 20 अक्टूबर 2026 को शाम 6:02 बजे
विजय मुहूर्त को धार्मिक दृष्टि से विशेष शुभ माना जाता है। इस दौरान पूजा, प्रार्थना और नए कार्य की शुरुआत करने की परंपरा है। हालांकि, पूजा का समय स्थानीय पंचांग और स्थान के अनुसार अलग हो सकता है।
14 शहरों में पूजा का शुभ समय
दशहरे पर विजय मुहूर्त और अपराह्न पूजा के समय में शहर के अनुसार अंतर हो सकता है। नीचे दी गई तालिका उपलब्ध कराई गई समय-सारणी पर आधारित है।
| शहर | विजय मुहूर्त | अपराह्न पूजा का समय |
|---|---|---|
| नई दिल्ली | 1:59 PM – 2:45 PM | 1:14 PM – 3:30 PM |
| नोएडा | 1:59 PM – 2:44 PM | 1:14 PM – 3:30 PM |
| गुरुग्राम | 2:00 PM – 2:46 PM | 1:15 PM – 3:31 PM |
| लखनऊ | 1:45 PM – 2:31 PM | 12:59 PM – 3:16 PM |
| पटना | 1:29 PM – 2:14 PM | 12:43 PM – 3:00 PM |
| जयपुर | 2:06 PM – 2:51 PM | 1:20 PM – 3:37 PM |
| मुंबई | 2:19 PM – 3:06 PM | 1:33 PM – 3:53 PM |
| पुणे | 2:16 PM – 3:02 PM | 1:29 PM – 3:49 PM |
| अहमदाबाद | 2:20 PM – 3:06 PM | 1:34 PM – 3:52 PM |
| कोलकाता | 1:17 PM – 2:03 PM | 12:30 PM – 2:49 PM |
| बेंगलुरु | 2:02 PM – 2:49 PM | 1:15 PM – 3:37 PM |
| हैदराबाद | 1:57 PM – 2:44 PM | 1:11 PM – 3:31 PM |
| चेन्नई | 1:51 PM – 2:39 PM | 1:04 PM – 3:26 PM |
| चंडीगढ़ | 2:00 PM – 2:46 PM | 1:15 PM – 3:31 PM |
दशहरे पर कैसे करें भगवान श्रीराम की पूजा?
विजयादशमी के दिन पूजा करने के लिए आप इन पारंपरिक चरणों का पालन कर सकते हैं।
-सबसे पहले पूजा स्थल की साफ-सफाई करें और भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी तथा हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
-भगवान श्रीराम के साथ मां दुर्गा का भी स्मरण करें और श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
-रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य अर्पित करें।
-अपनी परंपरा के अनुसार हवन करें और अंत में देवी-देवताओं की आरती उतारें।
-पूजा पूरी होने के बाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों में प्रसाद बांटें।
-शाम के समय स्थानीय परंपरा और आयोजन के अनुसार रावण दहन में शामिल हो सकते हैं।
पूजा करते समय स्वच्छता, श्रद्धा और अपनी पारिवारिक परंपराओं का ध्यान रखना चाहिए।
दशहरे पर कैसे करें मां अपराजिता की पूजा?
विजयादशमी पर मां अपराजिता की पूजा को विजय और सफलता की कामना से जोड़कर देखा जाता है। कुछ धार्मिक परंपराओं में मां जया और मां विजया की आराधना भी की जाती है।
अपराजिता पूजा की पारंपरिक विधि इस प्रकार बताई जाती है:
-पूजा के लिए स्वच्छ स्थान चुनें और वहां चंदन के लेप से अष्टदल चक्र बनाएं।
-परिवार की सुख-शांति और मंगल की कामना करते हुए पूजा का संकल्प लें।
-अष्टदल चक्र के मध्य में मां अपराजिता का आह्वान करते हुए ‘अपराजितायै नमः’ मंत्र का जाप करें।
-चक्र के दाईं ओर मां जया का और बाईं ओर मां विजया का स्मरण करें। इनका पूजन अपनी परंपरा के अनुसार करें।
-पुष्प, चंदन और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करके देवी से सुख, शांति और सफलता की प्रार्थना करें।
-अंत में श्रद्धापूर्वक पूजा संपन्न करने के लिए देवी का आभार व्यक्त करें।
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पूजा के समापन पर प्रचलित मंत्र का पाठ किया जाता है:
‘हारेण तु विचित्रेण भास्वत्कनकमेखला। अपराजिता भद्ररता करोतु विजयं मम॥’
मंत्र के पाठ में अलग-अलग धार्मिक स्रोतों के अनुसार शब्दों या उच्चारण में अंतर मिल सकता है। शुद्ध पाठ के लिए विश्वसनीय धार्मिक ग्रंथ या पुरोहित से पुष्टि करना उचित रहेगा।

