Site icon Dainik Savera Times

Home Vastu Tips: घर में सीढ़ियां बनवाते समय न करें ये 5 गलतियां, वास्तु के अनुसार ऐसे करें डिजाइन

Home Vastu Tips

Home Vastu Tips

Home Vastu Tips: घर बनवाते समय लोग अक्सर कमरों, किचन और मुख्य दरवाजे की दिशा पर ध्यान देते हैं, लेकिन वास्तु मान्यताओं में सीढ़ियों की दिशा और उनकी बनावट को भी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि गलत स्थान पर बनी सीढ़ियां घर के ऊर्जा संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि सही दिशा में बनी सीढ़ियां सकारात्मक माहौल बनाए रखने में सहायक होती हैं।

हालांकि, ये बातें पारंपरिक वास्तु मान्यताओं पर आधारित हैं। सीढ़ियों की योजना बनाते समय सुरक्षा और भवन निर्माण के नियमों को प्राथमिकता देना जरूरी है।

1. दक्षिण-पश्चिम दिशा को माना जाता है बेहतर

वास्तु के अनुसार घर में सीढ़ियों के निर्माण के लिए दक्षिण, पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना जाता है। खासतौर पर दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य कोण को भारी निर्माण के लिए बेहतर माना जाता है।

यदि घर के नक्शे में पर्याप्त जगह हो तो सीढ़ियों को इस हिस्से में रखने का विकल्प चुना जा सकता है। हालांकि अंतिम डिजाइन तय करते समय वास्तु के साथ रोशनी, वेंटिलेशन और आवाजाही की सुविधा का भी ध्यान रखना चाहिए।

2. ईशान कोण में भारी सीढ़ियों से बचने की मान्यता

उत्तर-पूर्व दिशा को वास्तु में ईशान कोण कहा जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस हिस्से को खुला और हल्का रखना बेहतर माना जाता है। इसी वजह से यहां भारी सीढ़ियों का निर्माण करने से बचने की सलाह दी जाती है।

यदि पहले से बनी सीढ़ियां इसी दिशा में हैं तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के उन्हें तोड़ने या स्थान बदलने के बजाय पूरे घर की संरचना को देखते हुए समाधान तलाशना बेहतर है।

3. सीढ़ियों का घुमाव रखें दक्षिणावर्त

वास्तु की कुछ परंपराओं में सीढ़ियों का घुमाव दक्षिणावर्त यानी क्लॉकवाइज रखने की सलाह दी जाती है। इसका अर्थ है कि ऊपर जाते समय सीढ़ियों का मोड़ दाईं ओर की दिशा में हो।

हालांकि सीढ़ियों का डिजाइन तय करते समय वास्तु के साथ-साथ उनकी चौड़ाई, ऊंचाई, रेलिंग और सुरक्षित चढ़ाई-उतराई का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

4. सीढ़ियों के नीचे कबाड़ जमा न करें

जगह की कमी के कारण कई घरों में सीढ़ियों के नीचे स्टोरेज या अलमारी बनाई जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इस स्थान को साफ और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है।

यहां टूटे सामान, बेकार वस्तुओं या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली चीजों का ढेर लगाने से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही सीढ़ियों के नीचे पूजा स्थल या मंदिर बनाने से भी वास्तु परंपराओं में परहेज करने की बात कही जाती है।

5. सीढ़ियों की संख्या और रोशनी पर दें ध्यान

कुछ वास्तु परंपराओं में सीढ़ियों की संख्या विषम रखने की सलाह दी जाती है, जैसे 11, 13, 15 या 17। हालांकि इस विषय पर अलग-अलग वास्तु परंपराओं में मतभेद भी मिलते हैं।

सीढ़ियों के आसपास पर्याप्त रोशनी होना, रास्ता खुला रखना और टूट-फूट को समय पर ठीक करना ज्यादा व्यावहारिक रूप से महत्वपूर्ण है। सीढ़ियों पर अनावश्यक सामान रखने से दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

ये भी पढ़ें…

वास्तु के साथ सुरक्षा को भी दें प्राथमिकता

घर में सीढ़ियों का निर्माण केवल वास्तु के आधार पर तय करना उचित नहीं है। सीढ़ियों की डिजाइन बनाते समय सुरक्षा, मजबूती, पर्याप्त प्रकाश, वेंटिलेशन और आरामदायक आवाजाही को प्राथमिकता देनी चाहिए।

Exit mobile version