नई दिल्ली: हिंदू धर्म में दस महाविद्याओं का विशेष स्थान है, जिनमें आठवीं शक्ति के रूप में माँ बगलामुखी की उपासना को अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। इन्हें पीताम्बरा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि पीला रंग इनकी पूजा में प्रमुख होता है। मान्यता है कि माँ बगलामुखी की आराधना से शत्रुओं पर विजय, वाणी पर नियंत्रण और बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
कब मनाई जाएगी बगलामुखी जयंती 2026?
साल 2026 में बगलामुखी जयंती शुक्रवार, 24 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस वर्ष अष्टमी तिथि 24 अप्रैल की सुबह 07:18 बजे से शुरू होकर 25 अप्रैल की सुबह 05:51 बजे तक रहेगी। ज्योतिषीय दृष्टि से शुक्रवार का दिन पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है।
माँ बगलामुखी का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ बगलामुखी को स्तंभन शक्ति की देवी कहा जाता है। भक्तों का विश्वास है कि इनकी कृपा से विरोधियों की शक्ति और नकारात्मक प्रभाव निष्क्रिय हो जाते हैं। विशेष रूप से कानूनी मामलों, विवादों और प्रतिस्पर्धा में सफलता पाने के लिए इनकी साधना को प्रभावी माना जाता है।
पूजा की सरल विधि
इस दिन पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है। भक्त सुबह स्नान कर पीले वस्त्र धारण करते हैं और पीले आसन पर बैठकर पूजा करते हैं। माँ की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है।
इसके बाद पीले फूल, पीला चंदन, पीले फल और पीले रंग का भोग जैसे बेसन के लड्डू अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान घी या सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कई भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और मंत्र जप करते हैं।
मंत्र जाप का महत्व
पूजा के समय माँ बगलामुखी के बीज मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। हल्दी की माला से मंत्र जाप को सर्वोत्तम बताया जाता है। यह साधना मानसिक शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ाने वाली मानी जाती है।
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प्रमुख तीर्थ स्थल
माँ बगलामुखी के प्रसिद्ध मंदिरों में मध्य प्रदेश के दतिया स्थित पीताम्बरा पीठ और हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा स्थित मंदिर प्रमुख हैं। जयंती के अवसर पर इन मंदिरों में विशेष हवन और अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिनमें देशभर से श्रद्धालु भाग लेते हैं। इस प्रकार, बगलामुखी जयंती 2026 भक्तों के लिए आध्यात्मिक साधना और आस्था का महत्वपूर्ण अवसर लेकर आ रही है।