Basoda Asthami 2026: होली के बाद आने वाली अष्टमी तिथि को बसोड़ा का पर्व मनाया जाता है, जिसे शीतला अष्टमी भी कहा जाता है। इस वर्ष यह पर्व 11 मार्च को मनाया जाएगा। देश के कई हिस्सों खासकर मालवा, निमाड़, राजस्थान और हरियाणा के कुछ क्षेत्रों में इस दिन माता शीतला की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। लोक परंपराओं के अनुसार इस दिन माता की पूजा करने से चेचक, खसरा और अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा होने की मान्यता है।
क्यों चढ़ाया जाता है बासी भोजन?
अधिकतर हिंदू त्योहारों में देवी-देवताओं को ताजा प्रसाद अर्पित किया जाता है, लेकिन बसोड़ा के दिन परंपरा इसके विपरीत है। इस दिन माता शीतला को बासी या ठंडा भोजन चढ़ाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक माता शीतला को ठंडे और शीतल खाद्य पदार्थ प्रिय होते हैं। इसी वजह से इस पर्व पर भोजन एक दिन पहले यानी सप्तमी तिथि को तैयार किया जाता है।
मान्यता यह भी है कि शीतला अष्टमी के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता और न ही नया खाना बनाया जाता है। इसलिए परिवार के लोग एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रखते हैं और अगले दिन उसी ठंडे भोजन का भोग माता को अर्पित करते हैं।
बसोड़ा के दिन क्या लगाया जाता है भोग?
इस दिन माता शीतला को ठंडे और पारंपरिक व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। आमतौर पर भक्त माता को ठंडे चावल पर घी डालकर भोग लगाते हैं। इसके अलावा मीठे चावल, दही-चावल, पूड़ी, पुए और हलवा भी माता को अर्पित किए जाते हैं। कई स्थानों पर घर की महिलाएं सुबह मंदिर जाकर इन व्यंजनों का प्रसाद चढ़ाती हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
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क्या है इस पर्व का महत्व?
बसोड़ा या शीतला अष्टमी केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं बल्कि लोक परंपराओं का भी महत्वपूर्ण पर्व है। माना जाता है कि माता शीतला की पूजा से घर-परिवार को रोगों से सुरक्षा मिलती है और परिवार में स्वास्थ्य व शांति बनी रहती है।
इस दिन श्रद्धालु माता शीतला के मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और ठंडे भोजन का भोग लगाकर अपने परिवार के लिए सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं।
मेष: दिन शुभ रहेगा...