Last Updated: October 6, 2026

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Bhaum Pradosh Vrat 2025 : आज है भौम प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि

December 2, 2025

Bhaum Pradosh Vrat 2025 : आज है भौम प्रदोष व्रत, जानें पूजा विधि

Bhaum Pradosh Vrat 2025 : हिंदू धर्म में भगवान शिव की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। बता दें कि भक्त उन्हें भोलेनाथ, शंकर और औघड़दानी नामों से स्मरण करते हैं, क्योंकि वे अल्प पूजा से भी शीघ्र प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं। पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को रखा जाने वाला प्रदोष व्रत शिव भक्ति का अत्यंत पुण्यदायी दिन है। मंगलवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत भौम प्रदोष कहलाता है और इसमें मंगल देव तथा महादेव दोनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भौम प्रदोष का शुभ मुहूर्त

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि इस वर्ष 2 दिसंबर 2025, मंगलवार को पड़ रही है। इस दिन प्रदोष काल, जिसे शिव पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है, शाम 5:24 बजे से रात 8:07 बजे तक रहेगा। भक्त इस अवधि में लगभग ढाई घंटे तक विधिवत पूजा कर सकते हैं।

भौम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

भौम प्रदोष के दिन संध्या समय स्नान कर साधक को शांत मन से शिव पूजा आरंभ करनी चाहिए। शिवलिंग पर जल, गंगाजल, पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन, बेलपत्र, धतूरा, धूप-दीप और मिष्ठान अर्पित करने का विधान बताया गया है। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का यथाशक्ति जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। परंपरा के अनुसार प्रदोष व्रत की कथा सुनने या कहने के बाद रुद्राक्ष की माला से मंत्र जप करने से पुण्य फल बढ़ता है। अंत में घी का दीया जलाकर शिव आरती करें और प्रसाद सभी के साथ स्वयं भी ग्रहण करें।

धार्मिक महत्व

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि सबसे पहले चंद्र देव ने प्रदोष व्रत करके अपनी कष्टों से मुक्ति पाई थी। माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति जीवन के विभिन्न दोषों और बाधाओं से राहत पाता है। भौम प्रदोष होने के कारण इस दिन का पुण्यफल और भी बढ़ जाता है तथा मंगल दोष, ऋण और मानसिक तनाव से छुटकारा मिलने की मान्यता है। भक्तों का विश्वास है कि इस व्रत से शिव और मंगल देव दोनों का संयुक्त आशीर्वाद प्राप्त होता है।

विशेष उपाय

भौम प्रदोष के दिन शिव चालीसा, हनुमान चालीसा और मंगल स्त्रोत का पाठ अत्यंत शुभ माना गया है। पुरानी मान्यता है कि हनुमान जी के 12 नामों का स्मरण करने से भगवान शिव के रुद्रावतार बजरंगबली की कृपा मिलती है और जीवन में मंगल कार्य बढ़ते हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। दैनिक सवेरा टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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