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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 23 फरवरी 2026

Daily Hukamnama

Daily Hukamnama

Daily Hukamnama: रागु सूही महला ४ छंत घरु १ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ सतिगुरु पुरखु मिलाइ अवगण विकणा गुण रवा बलि राम जीउ॥ हरि हरि नामु धिआइ गुरबाणी नित नित चवा बलि राम जीउ॥ गुरबाणी सद मीठी लागी पाप विकार गवाइआ ॥ हउमै रोगु गइआ भउ भागा सहजे सहजि मिलाइआ ॥ काइआ सेज गुर सबदि सुखाली गिआन तति करि भोगो ॥ अनदिनु सुखि माणे नित रलीआ नानक धुरि संजोगो ॥१॥

Daily Hukamnama अर्थ: राग सुही, घर १ में गुरु रामदास जी की बाणी ‘छन्त’ (छन्द)। अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे राम जी! मैं तुमसे सदके हूँ। मुझे गुरु पुरख मिला दे (जिस के द्वारा) मैं (तेरे) गुण याद करूँ, और (इन गुणों के बदले) अवगुण बेच दूँ (दूर कर दूँ) । हे हरी! तेरा नाम सुमीर कर मैं सदा ही गुरु की बाणी उच्चारू। जिस जीव-स्त्री को गुरु की बाणी सदा प्यारी लगती है, वह (अपने अंदर से)पाप विकार दूर कर लेती है। उस का हयुमे (अहंकार) रोग मिट जाता है, हरेक प्रकार का डर-सहम भाग जाता है, वह सदा सदा ही आत्मिक अडोलता में टिकी रहती है। गुरु के शब्द की बरकत से उस के हृदय में सेज सुख से भरपूर हो जाती है (सुख का घर बन जाती है), आत्मिक जीवन की सूझ से मूल-प्रभु के जुड कर वह प्रभु के मिलाप का सुख मानती है। हे नानक! धुर-दरगाह से जिस के भाग्य में संजोग लिखा होता है, वह हर समय आनंद में टिकी रह कर सदा (प्रभु के मिलाप का सुख मनाती है॥१॥

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