Last Updated: September 23, 2026

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Devuthani Ekadashi : इस दिन मनाई जाएगी देवउठनी एकादशी, जानिए पूजन विधि और व्रत के नियम

October 25, 2025

Devuthani Ekadashi : इस दिन मनाई जाएगी देवउठनी एकादशी, जानिए पूजन विधि और व्रत के नियम

Devuthani Ekadashi 2025 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार, देवउठनी एकादशी का व्रत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और पवित्र माना गया है। इस एकादशी को देवोत्थान एकादशी या देवउठावनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और एक बार फिर सृष्टि के कार्यभार को संभालते हैं।

इस वर्ष देवउठनी एकादशी 1 नवंबर 2025, शनिवार को मनाई जाएगी। द्रिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट पर समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत और पूजन 1 नवंबर को ही किया जाएगा, जबकि व्रत का पारण 2 नवंबर को दोपहर 1 बजकर 11 मिनट से 3 बजकर 23 मिनट तक किया जाएगा।

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देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। इस दिन घरों में गन्ने का मंडप बनाकर सुंदर चौक सजाया जाता है। चौक के बीच भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित किया जाता है और उनके चरणचिह्न बनाए जाते हैं। फिर उन्हें ढककर रखा जाता है और पूजन के समय गन्ना, सिंघाड़ा, फल, मिठाइयाँ और तुलसीदल का भोग लगाया जाता है। शाम को घी का दीपक जलाकर पूरी रात भगवान विष्णु की आराधना की जाती है।

माना जाता है कि देवउठनी एकादशी से विवाह, सगाई, गृहप्रवेश और मुंडन जैसे सभी शुभ कार्यों की शुरुआत की जा सकती है, क्योंकि चातुर्मास के दौरान इन कार्यों पर रोक रहती है।

एकादशी पर न करें ये कार्य:

इस दिन चावल और तामसिक भोजन का सेवन वर्जित है।
व्रतधारी व्यक्ति को पेड़-पौधों की पत्तियाँ नहीं तोड़नी चाहिए, न ही तुलसी तोड़नी चाहिए।
दातून या टूथपेस्ट से दांत साफ करना भी मना है।
व्रत रखने वाले भूल से भी गोभी, गाजर, शलजम, पालक, कुलफा का साग आदि का सेवन नहीं करें।

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