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Dhanteras 2026: धनतेरस पर कैसे करें भगवान धन्वंतरि की पूजा? जानें शुभ मुहूर्त और मंत्र

Dhanteras 2026 Puja Vidhi

Dhanteras 2026 Puja Vidhi

Dhanteras 2026 Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Mantra: हिंदू धर्म में धनतेरस का त्योहार बहुत खास माना जाता है। बता दें कि इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए हर साल धनतेरस के दिन उनकी पूजा की जाती है। भगवान धन्वंतरि को अच्छे स्वास्थ्य और आयुर्वेद का देवता माना जाता है।

इस साल धनतेरस का त्योहार 6 नवंबर 2026, शुक्रवार को मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से परिवार में अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। आइए जानते हैं धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और आरोग्य प्राप्ति का मंत्र।

धनतेरस 2026 भगवान धन्वंतरि पूजा का शुभ मुहूर्त

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा शाम के समय करना शुभ माना जाता है। साल 2026 में पूजा का शुभ समय इस प्रकार है-

– धन्वंतरि पूजा मुहूर्त: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक
– प्रदोष काल: शाम 05:33 बजे से रात 08:09 बजे तक
– वृषभ काल: शाम 06:02 बजे से 07:57 बजे तक

मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और परिवार के सदस्यों को अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद मिलता है।

धनतेरस पर कैसे करें भगवान धन्वंतरि की पूजा?

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ करनी चाहिए। पूजा करने का आसान तरीका इस प्रकार है:

1. सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
2. पूजा घर की अच्छी तरह सफाई करें और भगवान धन्वंतरि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
3. भगवान के सामने धूप और दीपक जलाएं।
4. उनके माथे पर हल्दी, चंदन और अक्षत लगाएं।
5. भगवान को फूल और फूलों की माला चढ़ाएं।
6. इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाएं।
7. भगवान धन्वंतरि के मंत्र का जाप करें।
8. आखिर में उनकी आरती करें और परिवार की अच्छी सेहत और खुशहाली की प्रार्थना करें।

पूजा के बाद घर के मुख्य दरवाजे, आंगन और सभी कोनों में दीपक जलाएं। इस दिन यमराज के नाम का भी एक दीपक जलाने की परंपरा है।

भगवान धन्वंतरि का आरोग्य प्राप्ति मंत्र

धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस मंत्र के जाप से अच्छी सेहत और निरोगी जीवन की प्रार्थना की जाती है।

मंत्र:

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरायेः।
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय।

त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप।
श्री धन्वंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

इस मंत्र का जाप शांत मन और पूरी श्रद्धा के साथ करना चाहिए।

कैसे हुआ था भगवान धन्वंतरि का जन्म?

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान धन्वंतरि का जन्म समुद्र मंथन के समय हुआ था। जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तब उसमें से कई अनमोल रत्न निकले थे। इसी दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत से भरा कलश लेकर प्रकट हुए थे। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। उन्हें आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि ने लोगों को स्वस्थ रहने और बीमारियों से बचने के लिए आयुर्वेद का ज्ञान दिया था। इसी वजह से धनतेरस के दिन उनकी पूजा करने का विशेष महत्व है।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा क्यों है खास?

धनतेरस का त्योहार सिर्फ धन और सोना-चांदी खरीदने तक ही सीमित नहीं है। यह दिन हमें अच्छे स्वास्थ्य का महत्व भी बताता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है।धार्मिक मान्यता है कि भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कृपा बनी रहती है। इसलिए इस धनतेरस पर धन-संपत्ति के साथ अपने और परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना भी न भूलें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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