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Ashadha Amavasya 2026: पितरों की शांति के लिए करें इन चीजों का दान, घर आएगी सुख-समृद्धि, जानें शुभ मुहूर्त

Ashadha Amavasya 2026

Ashadha Amavasya 2026

Ashadha Amavasya 2026: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। वर्ष 2026 में आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई, मंगलवार को पड़ रही है। मंगलवार के दिन आने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन पितरों का स्मरण, तर्पण और दान-पुण्य करने के लिए शुभ माना जाता है।

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से दान करने से पितृ दोष से राहत मिलने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आने की मान्यता है।

काले तिल का दान माना जाता है शुभ

आषाढ़ अमावस्या पर काले तिल का दान विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले तिल का दान करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और शनि, राहु-केतु से जुड़े दोषों के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है।

कई लोग इस दिन तिल से बने पदार्थों का दान भी करते हैं और पितरों की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।

अन्नदान से मिलती है पुण्य की प्राप्ति

अमावस्या के दिन जरूरतमंदों को अन्न का दान करना भी महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन गेहूं, चावल, सत्तू या अन्य खाद्य सामग्री का दान करने की परंपरा है।

मान्यता है कि अन्नदान से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं।

जल का दान और राहगीरों की सेवा का महत्व

आषाढ़ महीने में गर्मी और उमस को देखते हुए जलदान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पानी से भरा घड़ा दान करना या जरूरतमंद लोगों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था करना शुभ माना जाता है।

इसके अलावा छाता और चप्पल का दान भी इस दिन पुण्यदायी माना जाता है, क्योंकि इससे जरूरतमंद लोगों की सहायता होती है।

जरूरतमंदों को वस्त्र और भोजन कराएं

आषाढ़ अमावस्या पर गरीबों और जरूरतमंदों को सूती वस्त्र दान करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता है कि इससे पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन भूखे लोगों को भोजन कराना भी विशेष पुण्य का कार्य माना जाता है। संभव हो तो जरूरतमंदों को भोजन करवाकर पितरों का स्मरण करना चाहिए।

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दान करते समय रखें इन बातों का ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दान हमेशा श्रद्धा और निस्वार्थ भावना से करना चाहिए। दान देते समय मन में अहंकार या किसी के प्रति नकारात्मक भावना नहीं होनी चाहिए।

आषाढ़ अमावस्या पर अपनी क्षमता के अनुसार किसी भी शुभ वस्तु का दान किया जा सकता है। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया दान ही विशेष फल प्रदान करता है।

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