Falgun Amavasya Vrat Katha: फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को मनाई जाने वाली फाल्गुन अमावस्या इस वर्ष 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान, दान, जप-तप और व्रत करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है। श्रद्धालु यदि संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान कर भगवान की आराधना करें।
इस तिथि पर विशेष रूप से भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा का महत्व बताया गया है। साथ ही पितरों के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितृ दोष से मुक्ति तथा पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। फाल्गुन अमावस्या की व्रत कथा का पाठ भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
फाल्गुन अमावस्या व्रत कथा
पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, एक गांव में एक निर्धन ब्राह्मण अपनी पत्नी और सुंदर, गुणी कन्या के साथ रहता था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कन्या के विवाह में बाधाएं आ रही थीं। एक दिन उनके घर एक साधु का आगमन हुआ। ब्राह्मण की पुत्री ने श्रद्धा से उनकी सेवा की। प्रसन्न होकर साधु ने उसे लंबी आयु का आशीर्वाद दिया, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि उसकी कुंडली में वैधव्य योग है।
यह सुनकर ब्राह्मण चिंतित हो गया और उपाय पूछा। साधु ने बताया कि पास के गांव में ‘सोना’ नामक एक धोबिन रहती है, जो अत्यंत पतिव्रता और धर्मनिष्ठ है। यदि कन्या उसकी सेवा करे और विवाह के समय वह अपने मांग का सिंदूर कन्या की मांग में लगा दे, तो वैधव्य दोष दूर हो सकता है।
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ब्राह्मण की पुत्री ने साधु की सलाह मानकर प्रतिदिन प्रातःकाल उस स्त्री के घर जाकर चुपचाप सफाई और अन्य कार्य करने शुरू कर दिए। कई दिनों तक यह क्रम चलता रहा। एक दिन धोबिन और उसकी बहू को आश्चर्य हुआ कि घर के काम अपने आप कैसे हो जाते हैं। निगरानी करने पर उन्हें उस कन्या के सेवा भाव का पता चला। कन्या ने पूरी बात बता दी। उसकी निष्ठा से प्रभावित होकर धोबिन ने सहायता करने का निश्चय किया।
जब धोबिन ने अपनी मांग का सिंदूर कन्या की मांग में भरा, उसी समय उसके पति का देहांत हो गया। वह बिना जल ग्रहण किए ही निकली थी और संकल्प लिया कि पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने के बाद ही जल पिएगी। संयोग से वह दिन फाल्गुन अमावस्या का था। उसने ईंट के टुकड़ों से 108 बार भंवरी देकर पीपल की 108 परिक्रमा की और फिर जल ग्रहण किया। उसके इस तप और श्रद्धा से उसका पति पुनः जीवित हो उठा।
मान्यता है कि अमावस्या के दिन 108 बार परिक्रमा कर, सोना धोबिन तथा गौरी-गणेश की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
फाल्गुन अमावस्या 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 फरवरी 2026, शाम 5:34 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 17 फरवरी 2026, सुबह 5:30 बजे
ब्रह्म मुहूर्त (स्नान-दान के लिए): सुबह 5:35 बजे से 6:25 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:37 बजे से 1:23 बजे तक
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धार्मिक दृष्टि से फाल्गुन अमावस्या आत्मशुद्धि, पितृ तर्पण और सौभाग्य प्राप्ति का महत्वपूर्ण अवसर है। श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत-पूजन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और पुण्य फल की वृद्धि होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

