Site icon Dainik Savera Times

February Ekadashi 2026: फरवरी में कब रखा जाएगा एकादशी व्रत? जानिए विजया और आमलकी एकादशी की सही तारीखें

February Ekadashi 2026

February Ekadashi 2026

February Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने दो बार एकादशी व्रत रखा जाता है एक शुक्ल पक्ष में और दूसरी कृष्ण पक्ष में। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत को करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और माता लक्ष्मी सहित भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं फरवरी 2026 में आने वाली एकादशी व्रत की तारीखें, पारण समय और उनका धार्मिक महत्व…

फरवरी 2026 की एकादशी तिथियां

13 फरवरी 2026 – विजया एकादशी
28 फरवरी 2026 – आमलकी एकादशी

विजया एकादशी 2026

विजया एकादशी व्रत 13 फरवरी 2026 को रखा जाएगा। यह एकादशी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस व्रत को करने से व्यक्ति को हर कार्य में सफलता मिलती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। माना जाता है कि यह व्रत जीवन से नकारात्मकता और बाधाओं को दूर करता है।

Aaj ka rashifal 30 Jan 2026: ये 3 राशियां होंगी मालामाल! व्यापार में लाभ और नौकरी में तरक्की का बन रहा शुभ योग

विजया एकादशी पारण समय:

14 फरवरी 2026, सुबह 07:00 बजे से 09:14 बजे तक

द्वादशी तिथि का समापन: शाम 04:01 बजे

आमलकी एकादशी 2026

आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस एकादशी का विशेष संबंध आंवले के वृक्ष से माना गया है। मान्यता है कि इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति के पापों का नाश होता है। यह व्रत सुख, समृद्धि और आरोग्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

आमलकी एकादशी पारण समय:

28 फरवरी 2026, सुबह 06:47 बजे से 09:06 बजे तक
द्वादशी तिथि का समापन: रात 08:43 बजे

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 30 जनवरी 2026 

एकादशी व्रत की शुरुआत कब करनी चाहिए?

एकादशी व्रत की शुरुआत किसी भी महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी से की जा सकती है। हालांकि शास्त्रों में मार्गशीर्ष मास की उत्पन्ना एकादशी को व्रत आरंभ करने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इसी दिन देवी एकादशी का प्राकट्य हुआ था।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

Exit mobile version