Last Updated: September 23, 2026

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होलिका की अग्नि में क्यों डाली जाती हैं गेहूं और चने की हरी बालियां, इन बीमारियों से मुक्ति… जानें इसका धार्मिक महत्व

February 27, 2026

होलिका की अग्नि में क्यों डाली जाती हैं गेहूं और चने की हरी बालियां, इन बीमारियों से मुक्ति… जानें इसका धार्मिक महत्व

Holika Dahan News: होली का त्योहार आते ही पूरे देश में उत्साह और खुशियों का माहौल बन जाता है। रंगों का यह पर्व लोगों को आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश देता है। होली से एक दिन पहले फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में होलिका दहन 3 मार्च, मंगलवार को किया जाएगा। इस दिन होलिका की अग्नि में गेहूं, जौ और चने की हरी बालियां डालने की परंपरा है, जिसे कई जगह “होरहा” कहा जाता है।

होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी। यह 3 मार्च 2026 को शाम 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक चंद्र ग्रहण रहेगा। ग्रहण और सूतक काल समाप्त होने के बाद, यानी शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट के बीच होलिका दहन करना शुभ माना गया है।

क्यों डाली जाती हैं गेहूं, चना और जौ की हरी बालियां?
होलिका दहन के समय नई फसल की हरी बालियां अग्नि में अर्पित की जाती हैं। इसके पीछे धार्मिक, सामाजिक और वैज्ञानिक कारण जुड़े हुए हैं।

नवान्न की परंपरा क्या है?
कई जगह होलिका दहन को “नवान्नेष्टि यज्ञ” भी कहा जाता है। फाल्गुन के महीने में रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है। किसान अपनी नई उपज का पहला हिस्सा भगवान को अर्पित करते हैं। इस परंपरा का अर्थ है – ईश्वर को धन्यवाद देना। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती और समृद्धि बनी रहती है।

गेहूं और चने की बालियां अग्नि में डालना केवल एक धार्मिक रिवाज नहीं है, बल्कि किसान की मेहनत का सम्मान भी है। महीनों की कठिन मेहनत के बाद जब फसल तैयार होती है, तो किसान सबसे पहले भगवान को धन्यवाद देता है। यह परंपरा सुख, शांति और अच्छी पैदावार की कामना से जुड़ी हुई है।

भुनी हुई बालियों का महत्व
होलिका की अग्नि में भुनी हुई गेहूं की बालियों को कई स्थानों पर “होला” कहा जाता है। इन्हें प्रसाद के रूप में लोगों में बांटा जाता है। लोक मान्यता है कि यह शरीर को ऊर्जा देता है और मौसम बदलने के समय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है।

ऋतु परिवर्तन और स्वास्थ्य लाभ
फाल्गुन के बाद गर्मी का मौसम शुरू हो जाता है। ऐसे समय में भुना हुआ चना और गेहूं हल्का, सुपाच्य और पौष्टिक आहार माना जाता है। इनमें फाइबर और ऊर्जा भरपूर मात्रा में होती है, जो शरीर को ताकत देती है और बदलते मौसम में बीमारियों से बचाने में मदद करती है।

सात बालियों का विशेष महत्व
कई जगह होलिका दहन में सात गेहूं की बालियां अग्नि में डालने की परंपरा है। अंक सात को शुभ माना जाता है। यह उन्नति, आरोग्य और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। कुछ लोग भुनी हुई बालियों को घर लाकर संभालकर रखते हैं और इसे शुभ मानते हैं।

मां अन्नपूर्णा को प्रसन्न करने की मान्यता
यह भी माना जाता है कि नई फसल अर्पित करने से अन्न की देवी मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं। उनके आशीर्वाद से घर में धन-धान्य और समृद्धि बनी रहती है। भारतीय संस्कृति में अन्न का बहुत सम्मान किया जाता है। होलिका दहन का दिन हमें यही संदेश देता है कि अन्न का आदर करें और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करें।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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