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Guru Pradosh Vrat Katha: गुरु प्रदोष व्रत के लिए जरूरी है ये कथा, जानें इस पावन दिन का महत्व और शुभ मुहूर्त

Guru Pradosh Vrat Katha

Guru Pradosh Vrat Katha: आज गुरु प्रदोष व्रत का पावन अवसर है, जिसे बृहस्पति प्रदोष के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में ज्ञान, शिक्षा, सुख-समृद्धि और आर्थिक स्थिरता आती है। साथ ही, कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत होती है।

विशेष रूप से, गुरु प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त आज शाम 05:35 बजे से 08:19 बजे तक है। इस समय व्रत और पूजा करने से अधिक फल की प्राप्ति मानी जाती है।

Guru Pradosh Vrat Katha
Guru Pradosh Vrat Katha

गुरु प्रदोष व्रत की कथा

पुराणों के अनुसार, एक समय देवताओं और दैत्य वृत्रासुर की सेनाओं के बीच भयंकर युद्ध हुआ। देवताओं की सेना जीत हासिल कर चुकी थी, लेकिन वृत्रासुर स्वयं युद्धभूमि में प्रवेश कर गया। अपनी आसुरी शक्ति और विकराल रूप से उसने देवताओं को भयभीत कर दिया।

इस संकट में देवता गुरुदेव बृहस्पति की शरण में गए। बृहस्पति ने उन्हें वृत्रासुर का वास्तविक रूप समझाया। कहा गया कि वृत्रासुर पूर्व जन्म में चित्ररथ नामक राजा था। एक बार चित्ररथ कैलाश पर्वत पर माता पार्वती को वाम अंग में देखा और उन्हें अपमानजनक बातें कह दीं। इस अपमान से क्रोधित माता पार्वती ने उसे दैत्य रूप धारण करने का श्राप दे दिया।

शाप के प्रभाव से चित्ररथ राक्षस योनि में जन्मा और ऋषि त्वष्टा के तप से उत्पन्न होकर वृत्रासुर बन गया। बृहस्पति जी ने देवताओं को यह निर्देश दिया कि गुरु प्रदोष व्रत का पालन करें, जिससे शिव की कृपा प्राप्त होकर वृत्रासुर पर विजय संभव हो सके।

देवताओं ने गुरु प्रदोष व्रत और पूजा के प्रभाव से अंततः वृत्रासुर पर विजय प्राप्त की। इस प्रकार यह व्रत संकट मोचन और धार्मिक फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

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नोट: यहां दी गई जानकारी धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

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