होलाष्टक 2026: 24 फरवरी से शुरू हो रहा है और यह 3 मार्च तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र में इस आठ दिवसीय अवधि को विशेष महत्व दिया गया है। होली की तैयारियां इसी समय से शुरू होती हैं और मान्यता है कि इसी दौरान शिव जी ने कामदेव को भस्म किया था। इस कारण से इसे ‘उग्र ग्रहों का काल’ भी माना जाता है, जब कोई भी शुभ कार्य करना टाला जाता है।
होलाष्टक में किन कामों से बचें
मांगलिक कार्य टालें: शादी, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नामकरण जैसे शुभ कार्य इस समय करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे शुभ फल देने वाला नहीं माना जाता।
नया निवेश या व्यवसाय न शुरू करें: नया घर खरीदना, व्यवसाय शुरू करना या बड़े निवेश करने से नुकसान या बाधा आने की संभावना होती है।
तनाव और विवाद से दूर रहें: मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इस दौरान किसी भी बहस, गुस्से या विवाद से बचना रिश्तों में मधुरता बनाए रखने के लिए जरूरी है।
आहार में संयम रखें: मांसाहार, शराब और अत्यधिक मसालेदार या तामसिक भोजन से परहेज करें। यह मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखता है।
नकारात्मकता से बचें: आलस्य और नकारात्मक विचार बढ़ सकते हैं। इस समय ध्यान, पूजा और सकारात्मक गतिविधियों में मन लगाना चाहिए।
होलाष्टक में क्या करें
ज्योतिषियों के अनुसार, होलाष्टक के दौरान आध्यात्मिक साधना को बढ़ावा देना चाहिए। इस समय हनुमान चालीसा और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करना विशेष फलदायक माना गया है। भगवान की भक्ति में लीन रहें और नकारात्मक लोगों से दूरी बनाए रखें। अनावश्यक बहस या झगड़े से बचना चाहिए।
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होलाष्टक का ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व
होलाष्टक से पहले के ये आठ दिन तप, साधना और श्रद्धा की ऊर्जा लिए होते हैं। पुराणों में वर्णित कथा के अनुसार, असुर राजा हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए अनेक कठिनाइयां दी थीं। लेकिन प्रह्लाद की अटल श्रद्धा और विश्वास ने सभी परीक्षाओं को पार कर लिया। इसी वजह से इन आठ दिनों को संयम, सतर्कता और आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है।
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