Hukamnama 07 Dec 2025: तिलंग बाणी भगता की कबीर जी ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ बेद कतेब इफतरा भाई दिल का फिकरु न जाइ ॥ टुकु दमु करारी जउ करहु हाजिर हजूरि खुदाइ ॥१॥ बंदे खोजु दिल हर रोज ना फिरु परेसानी माहि ॥ इह जु दुनीआ सिहरु मेला दसतगीरी नाहि ॥१॥ रहाउ ॥ दरोगु पड़ि पड़ि खुसी होइ बेखबर बादु बकाहि ॥ हकु सचु खालकु खलक मिआने सिआम मूरति नाहि ॥२॥असमान मिह्याने लहंग दरीआ गुसल करदन बूद ॥ करि फकरु दाइम लाइ चसमे जह तहा मउजूदु ॥३॥ अलाह पाकं पाक है सक करउ जे दूसर होइ ॥ कबीर करमु करीम का उहु करै जानै सोइ ॥४॥१॥
Hukamnama 07 Dec 2025 अर्थ: हे भाई! (वाद विवाद की खातिर) वेदों कतेबों के हवाले दे दे कर ज्यादा बातें करने से (मनुख के अपने) दिल के सहम दूर नहीं होते। (हे भाई!) अगर आप अपने मन को एक पल ही टिकाऊ, तो आपको सब मैं ही भगवान बस्ता दिखेगा (किसी के विरुद्ध तर्क करने की जरुरत नहीं पड़ेगी) ।१। (अपने ही) दिल को हर रोज खोजो, (बहस )की घबराहट में न भटक। यह जगत एक जादू जैसा है, एक तमाशा सा है, (इसमें से इस व्यर्थ वाद विवाद से ) हाथ आने वाली कोई शै नहीं॥1॥रहाउ॥ बे समझ लोग (अन-मत की धर्म पुस्तकों के बारे यह) पड़ पड़ कर (की इन में जो लिखा है) झूठ (है), खुश हो हो कर बहस करते हैं। (परन्तु वो यह नहीं जानते कि ) सदा कायम रहने वाला भगवान खलकत में (भी) बस्ता है, (न तो वह अलग सातवें आसमान पर बैठा है और) न वह परमात्मा किशन की मूरत है॥2 ॥सातवें आसमान पर बैठा समझने की जगह, हे भाई!) वह प्रभू-रूप दरिया पर अंतःकरण में लहरें मार रहा है, तुझे उस में स्नान करना था। सो, उस की सदा बंदगी कर, (यह भगती का) चश्मा लगा (कर देख), वह हर जगह मौजूद है ॥३॥ रब सब से पवित्र (हस्ती) है (उस से पवित्र कोई अन्य नहीं है), इस बात पर मैं तब ही शंका करूं, अगर उस रब जैसा कोई अन्य हो। हे कबीर जी! (इस बात को) वह मनुष्य ही समझ सकता है जिस को वह समझने-योग्य बनाए। और, यह बख़्श़श़ उस बख़्श़श़ करने वाले के अपने हाथ है ॥४॥१॥
मेष: दिन शुभ रहेगा...