Hukamnama 08 Nov 2025: गूजरी महला ४ घरु २ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ हरि बिनु जीअरा रहि न सकै जिउ बालकु खीर अधारी ॥ अगम अगोचर प्रभु गुरमुखि पाईऐ अपुने सतिगुर कै बलिहारी ॥१॥ मन रे हरि कीरति तरु तारी ॥ गुरमुखि नामु अम्रित जलु पाईऐ जिन कउ क्रिपा तुमारी ॥ रहाउ ॥
Hukamnama 08 Nov 2025 अर्थ: राग गूजरी घर २ में गुरु रामदास जी की बानी। अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे भाई! मेरी कमजोर जींद(जान) परमात्मा (के मिलाप) के बिना धीरज नहीं पकड़ सकती, जैसे छोटा बालक दूध के सहारे ही रह सकता है। हे भाई! वेह प्रभु, जो अपहुच है (जिस तक जिव अपनी समझदारी के बल से नहीं पहुच सकता), जिस तक मनुख की ज्ञान-इन्द्रियों की पहुच नहीं हो सकती, वेह परमात्मा गुरु की सरन आने से ही मिलता है, (इस लिए) मैं अपने गुरु से (सदा) कुर्बान जाता हूँ।१। हे (मेरे ) मन! परमात्मा की सिफत-सलाह के द्वारा (संसार- सागर से) पार निकलने का यतन करा कर। हे मन! आत्मिक जीवन देने वाला हरी-नाम-जल गुरु की सरन आने से ही मिलता है। (परन्तु-हे प्रभु! तेरा नाम-जल उसी को मिलता है) जिस के ऊपर तेरी कृपा होती है।रहाउ।
मेष: दिन शुभ रहेगा...