Last Updated: October 27, 2026

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Hukamnama श्री हरमंदिर साहिब जी 14 दिसंबर 2025

December 14, 2025

Hukamnama श्री हरमंदिर साहिब जी 14 दिसंबर 2025

Hukamnama: रागु देवगंधारी महला ५ घरु ३ ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ मीता ऐसे हरि जीउ पाए ॥ छोडि न जाई सद ही संगे अनदिनु गुर मिलि गाए ॥१॥ रहाउ ॥ मिलिओ मनोहरु सरब सुखैना तिआगि न कतहू जाए ॥ अनिक अनिक भाति बहु पेखे प्रिअ रोम न समसरि लाए ॥१॥ मंदरि भागु सोभ दुआरै अनहत रुणु झुणु लाए ॥ कहु नानक सदा रंगु माणे ग्रिह प्रिअ थीते सद थाए ॥२॥१॥२७॥

Hukamnama अर्थ: राग देवगंधारी, घर ३ में गुरु अर्जनदेव जी की बाणी। अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे भाई! मैने ऐसे मित्र प्रभु जी खोज लिए हैं,जो मुझे छोड़ कर नहीं जाते, मेरे साथ रहते हैं, गुरु को मिल के में हर समय उस के गुण गाता रहता हूँ।१।रहाउ। हे भाई! मेरे मन को मोह लेने वाला, मुझे सारे सुख देने वाला प्रभु मिल गया है, मुझे छोड़ के वह और कहीं भी नहीं जाता, (सुखो के इकरार करने वाले) और बहुत अनेकों किस्मो के (व्यक्ति) देख लिए हैं, परन्तु कोई भी प्यारे प्रभु के एक बाल की बराबरी भी नहीं कर सकता।१। हे नानक! कह-जिस जिव के हिरदय-घर में प्रभु जी सदा के लिए आ टिकते हैं, वह सदा आत्मिक आनंद मनाता हैं, उस के हृदय -घर में भाग्य जग जाता है, उस के हृदय में इक रस, धीरे धीरे ख़ुशी का गीत होता रहता है, उस को प्रभु के दर से सोभा मिलती है।२।१।२७।

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