Hukamnama 14 Oct 2025 : गूजरी महला १॥ ऐ जी ना हम उतम नीच न मधिम हरि सरणागति हरि के लोग ॥ नाम रते केवल बैरागी सोग बिजोग बिसरजित रोग॥१॥ भाई रे गुर किरपा ते भगति ठाकुर की ॥ सतिगुर वाकि हिरदै हर निरमलु ना जम काणि न जम की बाकी ॥१॥ रहाउ॥
Hukamnama 14 Oct 2025 अर्थ: हे भाई! जो आदमी परमात्मा की भक्ति करते हैं जो परमात्मा की सरन आते हैं उनको न यह मान होता है कि हम सब से ऊँची या मध्यम जाति के हैं, न यह सहम होता है कि हम नीची जाति के हैं। सिर्फ प्रभू-नाम में रंगे रहने करके वह (इस ऊचता नीचता आदि की तरफ से) निर्मोह रहते हैं। चिंता, विछोड़ा, रोग आदि वह सब भुला चुके होते हैं।१। हे भाई! परमात्मा की भक्ति गुरु की कृपा से ही हो सकती है। जिस मनुख ने सतगुरु के शब्द के द्वारा अपने हृदये में परमात्मा का पवित्र नाम बसा लिया है, उस को यम की मोहताजी नहीं रहती, उस के जिम्मे पूर्व किये कर्मो का कोई ऐसा बाकी लेखा नहीं रह जाता जिस कारण यमराज का उस ऊपर जोर पड़ सके।१।रहाउ।

