Hukamnama 18 Sept 2026: बिलावलु महला ५ छंत
ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ सखी आउ सखी वसि आउ सखी असी पिर का मंगलु गावह ॥ तजि मानु सखी तजि मानु सखी मतु आपणे प्रीतम भावह ॥ तजि मानु मोहु बिकारु दूजा सेवि एकु निरंजनो ॥ लगु चरण सरण दइआल प्रीतम सगल दुरत बिखंडनो ॥ होइ दास दासी तजि उदासी बहुड़ि बिधी न धावा ॥ नानकु पइअम्पै करहु किरपा तामि मंगलु गावा ॥१॥
Hukamnama 18 Sept 2026 अर्थ: राग बिलावलु में गुरु अर्जनदेव जी की बाणी ‘छंत’ । अकाल पुरख एक है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। हे सखियों! आओ (मिल कर बैठें) हे सखी! आओ प्रभु की रजा मैं चलें, और प्रभु-पति की सिफत-सलाह का गीत गायें। हे सखी! (अपने अंदर से) अहंकार दूर कर, शायद (इस प्रकार) हम अपने प्रीतम प्रभु-पति को अच्छे लग सकें। हे सखी! (अपने अंदर से) अहंकार दूर कर, मोह दूर कर, माया के प्यार वाला विकार दूर कर, सिर्फ निर्लेप प्रभु की शरण पड़ा रह। सारे पापों के नास करने वाला दया के चश्मे प्रीतम प्रभु के चरणों की ओट पकडे रख। हे सखी! (मेरे ऊपर भी) कृपा कर, मैं (प्रभु के) दासों की दासी बन कर (सिफत-सलाह की तरफ से) उपरामता छोड़ कर किसी और तरफ न भटकते फिरूं। नानक बेनती करता है- (तू कृपा करे), तभी मैं (भी) परमात्मा की सिफत-सलाह का गीत गा सकूँगा ॥१॥
मेष: दिन शुभ रहेगा...