Hukamnama 21 April 2026: धनासरी महला ४ घरु १ चउपदे। ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ जो हरि सेवहि संत भगत तिन के सभि पाप निवारी ॥ हम ऊपरि किरपा करि सुआमी रखु संगति तुम जु पिआरी ॥१॥ हरि गुण कहि न सकउ बनवारी ॥ हम पापी पाथर नीरि डुबत करि किरपा पाखण हम तारी ॥ रहाउ ॥ जनम जनम के लागे बिखु मोरचा लगि संगति साध सवारी ॥ जिउ कंचनु बैसंतरि ताइओ मलु काटी कटित उतारी ॥२॥ हरि हरि जपनु जपउ दिनु राती जपि हरि हरि हरि उरि धारी ॥ हरि हरि हरि अउखधु जगि पूरा जपि हरि हरि हउमै मारी ॥३॥ हरि हरि अगम अगाधि बोधि अपर्मपर पुरख अपारी ॥ जन कउ क्रिपा करहु जगजीवन जन नानक पैज सवारी ॥४॥१॥
Hukamnama 21 April 2026 अर्थ: धनासरी महला ४ घरु १ चउपदे ईश्वर एक है, जिसे सतगुरु की कृपा से पाया जा सकता है। हे भगवान् ! जो सन्त एवं भक्तजन तेरी आराधना करते हैं, तू उनके सभी पाप दूर कर देता हैं। हे मेरे स्वामी ! मुझ पर अपनी कृपा करो और मुझे उस सुसंगति में रखो, जो तुझे प्यारी लगती है॥१॥ हे परमात्मा ! मैं तेरी महिमा कथन नहीं कर सकता। हम पापी पत्थर की भांति जल में डूब रहे हैं, अपनी कृपा करके हम पापी पत्थरों का उद्धार कर दीजिए॥ रहाउ॥ मैंने अपने मन को जन्म-जन्मांतरों की लगी हुई विष रूपी माया की जंग साधसंगत में सम्मिलित होकर यूं उतार दी है, जैसे स्वर्ण को अग्नि में तपा कर उसकी सारी मैल को काटा एवं काट कर उतार दिया जाता है।॥२॥ मैं दिन-रात हरि-नाम का जाप जपता रहता हूँ और हरि-नाम जपकर हरि को अपने हृदय में बसाता हूँ। परमात्मा का ‘हरि-हरि’ नाम इस जगत में पूर्ण औषधि है और हरि-नाम का भजन करके मैंने अपने अहंकार को मार दिया है॥३॥ हरि-परमेश्वर अगम्य, अगाध ज्ञान वाला, अपरम्पर सर्वशक्तिमान एवं अनन्त है। हे जगत के जीवन ! अपने दास पर कृपा करो और दास नानक की प्रतिष्ठा कायम रखो ॥४॥१ ॥
मेष: दिन शुभ रहेगा...