
Hukamnama 23 June 2026: ੴ सतिगुर प्रसादि ॥ रागु सूही बाणी सेख फरीद जी की ॥ तपि तपि लुहि लुहि हाथ मरोरउ ॥ बावलि होई सो सहु लोरउ ॥ तै सहि मन महि कीआ रोसु ॥ मुझु अवगन सह नाही दोसु ॥१॥ तै साहिब की मै सार न जानी ॥ जोबनु खोइ पाछै पछुतानी ॥१॥ रहाउ ॥ काली कोइल तू कित गुन काली ॥ अपने प्रीतम के हउ बिरहै जाली ॥ पिरहि बिहून कतहि सुखु पाए ॥ जा होइ क्रिपालु ता प्रभू मिलाए ॥२॥
Hukamnama 23 June 2026 अर्थ: अकाल पुरख है और सतगुरु की कृपा द्वारा मिलता है। सूही में शेख फरीद जी की बाणी। बड़ी दुखी हो कर बड़ी तड़प के मैं अब साथ मल रही हूँ, और कमली हो कर मैं अब उस खसम प्रभु को खोज रही हूँ। हे खसम-प्रभु! तभी तूने अपने मन में मेरे से रोस किया। तेरा कोई दोष (मेरी इस बुरी हालत बारे) नहीं है, मेरे में ही थे॥1॥ हे मेरे मालिक मैंने तेरी कदर न जानी। जवानी का समय गँवा कर अब में पछ्ता रही हूँ॥1॥रहाउ॥ (अब मैं काली कोयल से पूछती फिर रही हूँ) हे काली कोयल! मैं तो अपने कर्मों की मारी दुखी हूँ ही) तुन भी क्यों काली (हो गयी) है? (कोयल भी यही उत्तर देती है ) मुझे मेरे प्रीतम के विछोडे ने जला दिया है। (ठीक है) खसम से बिछुड़ कर कोई सुख पा सकती है? (पर जीव स्त्री के बस की बात नहीं) जब प्रभु आप मेहरबान होता है तो आप ही मिला देता है॥2॥