Hukamnama 23 September 2025 : सूही महला ३ ॥ जुग चारे धन जे भवै बिनु सतिगुर सोहागु न होई राम ॥ निहचलु राजु सदा हरि केरा तिसु बिनु अवरु न कोई राम ॥ तिसु बिनु अवरु न कोई सदा सचु सोई गुरमुखि एको जाणिआ ॥ धन पिर मेलावा होआ गुरमती मनु मानिआ ॥ सतिगुरु मिलिआ ता हरि पाइआ बिनु हरि नावै मुकति न होई ॥ नानक कामणि कंतै रावे मनि मानिऐ सुखु होई ॥१॥ सतिगुरु सेवि धन बालड़ीए हरि वरु पावहि सोई राम ॥ सदा होवहि सोहागणी फिरि मैला वेसु न होई राम ॥ फिरि मैला वेसु न होई गुरमुखि बूझै कोई हउमै मारि पछाणिआ ॥ करणी कार कमावै सबदि समावै अंतरि एको जाणिआ ॥ गुरमुखि प्रभु रावे दिनु राती आपणा साची सोभा होई ॥ नानक कामणि पिरु रावे आपणा रवि रहिआ प्रभु सोई ॥२॥ गुर की कार करे धन बालड़ीए हरि वरु देइ मिलाए राम ॥ हरि कै रंगि रती है कामणि मिलि प्रीतम सुखु पाए राम ॥ मिलि प्रीतम सुखु पाए सचि समाए सचु वरतै सभ थाई ॥ सचा सीगारु करे दिनु राती कामणि सचि समाई ॥ हरि सुखदाता सबदि पछाता कामणि लइआ कंठि लाए ॥ नानक महली महलु पछाणै गुरमती हरि पाए ॥३॥ सा धन बाली धुरि मेली मेरै प्रभि आपि मिलाई राम ॥ गुरमती घटि चानणु होआ प्रभु रवि रहिआ सभ थाई राम ॥ प्रभु रवि रहिआ सभ थाई मंनि वसाई पूरबि लिखिआ पाइआ ॥ सेज सुखाली मेरे प्रभ भाणी सचु सीगारु बणाइआ ॥ कामणि निरमल हउमै मलु खोई गुरमति सचि समाई ॥ नानक आपि मिलाई करतै नामु नवै निधि पाई ॥४॥३॥४॥
Hukamnama 23 September 2025 अर्थ: हे भाई! युग चाहे कोई भी हो गुरु की शरण आने के बिना खसम प्रभु का मिलाप नहीं होता। जीव स्त्री चाहे चारों युगों में भटकती रहे , उस प्रभु का हुक्म अटल है कि गुरु के द्वारा ही उस प्रभु का मिलाप प्राप्त होता है। उसके बिना कोई और उस प्रभु बराबर नहीं जो इस हुकम को बदल सके हे। भाई उस प्रभु के बिना उस जैसा और कोई नहीं वह प्रभु खुद ही सदा कायम रहने वाला है । गुरु के सन्मुख रहने वाली जीव स्त्री उस एक के साथ ही गहरी साँझ बनाती है। जब गुरु की मत पर चलके जीव स्त्री का मन परमात्मा की याद में समा जाता है तब जीव स्त्री का प्रभु पति के साथ मिलाप हो जाता है कि भाई जब गुरु मिलता है तब ही प्रभु की प्राप्ति होती है। गुरु ही प्रभु का नाम जीव स्त्री के हृदय में बसाता है और परमात्मा के नाम के बिना माया के बंधन से छुटकारा नहीं मिलता । हे नानक! अगर मन प्रभु की याद में समा जाए तो जीव स्त्री प्रभु का मिलाप बनाती है । उसके हृदय में आनंद पैदा होता रहता है । अनजान जीव , गुरु के बताए काम किया कर इस तरह तू प्रभु पति को प्राप्त कर लेगी , तू सदा के लिए खसम वाली हो जाएगी फिर कभी प्रभु पति से बिछोड़ा नहीं होगा । कोई कोई जीव स्त्री गुरु के बताए रहा पर चल के यह बात समझती है कि गुरु के द्वारा प्रभु के साथ मिलाप हुआ फिर उससे कभी बिछोड़ा नहीं होता। वह जीव स्त्री अपने अंदर से अहंकार दूर करके प्रभु के साथ सांझ बनाती है वह जीव स्त्री प्रभु सिमरन करने वाले काम करती रहती है। गुरु के शब्द में लीन रहती है। अपने हृदय में एक प्रभु के साथ जीव पहचान बनाए रखती है। हे नानक! गुरू के सम्मुख रहने वाली जीव स्त्री दिन-रात अपने प्रभु का नाम सुमिरन करती रहती है। लोक परलोक में उसको सदा कायम रहने वाली इज्जत मिलती है । वह जीव स्त्री अपने प्रभु पति को हर समय याद करती है जो हर जगह विद्यमान है।

