Site icon Dainik Savera Times

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 11 June 2026

Hukamnama 11 June 2026

Hukamnama 11 June 2026

Hukamnama: सोरठि महला ९ ॥ मन रे प्रभ की सरनि बिचारो ॥ जिह सिमरत गनका सी उधरी ता को जसु उर धारो ॥१॥ रहाउ ॥ अटल भइओ ध्रूअ जा कै सिमरनि अरु निरभै पदु पाइआ ॥ दुख हरता इह बिधि को सुआमी तै काहे बिसराइआ ॥१॥ जब ही सरनि गही किरपा निधि गज गराह ते छूटा ॥ महमा नाम कहा लउ बरनउ राम कहत बंधन तिह तूटा ॥२॥ अजामलु पापी जगु जाने निमख माहि निसतारा ॥ नानक कहत चेत चिंतामनि तै भी उतरहि पारा ॥३॥४॥

हे मन! परमात्मा की सरन आ कर उस के नाम का ध्यान धरा करो। जिस परमात्मा का सुमिरन करते हुए गणिका (विकारों में डूबने) से बच गयी थी तू भी, (हे बही!) उस की सिफत-सलाह अपने हृदय में बसी रख॥१॥रहाउ॥ हे भाई ! जिस परमात्मा के सुमिरन के द्वारा ध्रुव् सदा के लिए अटल हो गया और उस ने निर्भयता से आत्मिक दर्जा हासिल कर लिया था, तूँ ने उस परमात्मा को क्यों भुलाया हुआ है, वह तो इस तरह के दुखों का नास करने वाला है॥१॥ हे भाई! जिस समय ही (गज ने) कृपा के सागर परमात्मा का सहारा लिया वह गज (हठी) तेंदुए के फाँस से निकल गया था। मैं कब तक परमात्मा के नाम की बधाई बतायुं ? परमात्मा का नाम उच्चार कर उस (हाथी) के बंधन टूट गए थे॥२॥

Exit mobile version