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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 07 मई 2026

Hukamnama 7 May 2026

Hukamnama 7 May 2026

Hukamnama: सोरठि महला १ ॥ तू प्रभ दाता दानि मति पूरा हम थारे भेखारी जीउ ॥ मै किआ मागउ किछु थिरु न रहाई हरि दीजै नामु पिआरी जीउ ॥१॥ घटि घटि रवि रहिआ बनवारी ॥ जलि थलि महीअलि गुपतो वरतै गुर सबदी देखि निहारी जीउ ॥ रहाउ ॥ मरत पइआल अकासु दिखाइओ गुरि सतिगुरि किरपा धारी जीउ ॥ सो ब्रहमु अजोनी है भी होनी घट भीतरि देखु मुरारी जीउ ॥२॥ जनम मरन कउ इहु जगु बपुड़ो इनि दूजै भगति विसारी जीउ ॥ सतिगुरु मिलै त गुरमति पाईऐ साकत बाजी हारी जीउ ॥३॥ सतिगुर बंधन तोड़ि निरारे बहुड़ि न गरभ मझारी जीउ ॥ नानक गिआन रतनु परगासिआ हरि मनि वसिआ निरंकारी जीउ ॥४॥८॥

अर्थ :-हे भगवान जी ! तूँ हमे सब पदार्थ देने वाला हैं, दातें देने में तूँ कभी झिझकता नहीं, हम तेरे (दर के) भिखारी हैं । मैं तेरे से कौन सी शै मांगू ? कोई शै सदा टिकी रहने वाली नहीं। (हूँ, तेरा नाम सदा-थिर रहने वाला है) हे हरि ! मुझे अपना नाम देह, मैं तेरे नाम को प्यार करू।1। परमात्मा हरेक शरीर में व्यापक है। पानी में धरती में, धरती के ऊपर आकाश में हर जगह मौजूद है पर छुपा हुआ है। (हे मन !) गुरु के शब्द के द्वारा उस को देख।रहाउ। (हे भाई ! जिस मनुख के ऊपर) गुरु ने सतिगुरु ने कृपा की उस को उस ने धरती आकाश पाताल (सारा जगत परमात्मा की अस्तित्व के साथ भरपूर) दिखा दिया। वह परमात्मा जूनों में नहीं आता, अब भी मौजूद है आगे को मौजूद रहेगा, (हे भाई !) उस भगवान को तूँ अपने हृदय में (बसता) देख।2। यह भाग-हीण जगत जन्म मरन का गेड़ सहेड़ बैठा है क्योंकि इस ने माया के मोह में पड़ के परमात्मा की भक्ति भुला दी है। अगर सतिगुरु मिल जाए तो गुरु के उपदेश पर चलने से (भगवान की भक्ति) प्राप्त होती है, पर माया मे फँसे जीव (भक्ति से दूर हो कर मनुष्य जन्म की) बाजी हार जाते हैं।3। हे सतिगुरु ! माया के बंधन तोड़ के जिन मनुष्यो को तूँ माया से निरलेप कर देता हैं, वह फिर जन्म मरन के चक्र में नहीं पड़ता। हे नानक ! (गुरु की कृपा के साथ जिन के अंदर परमात्मा के) ज्ञान का रतन चमक पड़ता है, उन के मन में हरि निरंकार (आप) आ बसता है।4 8।

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